लछनपुर सुसाइड मिस्ट्री : वीडियो कॉल की स्क्रीन पर थमी ‘रजनी’ की सांसें, आखिरी कॉल में मौत का क्या था पैगाम?…

जांजगीर-चांपा। एक सूना घर, बंद दरवाजा और खामोश होती धड़कनें। जिले के लछनपुर गांव में जो हुआ, उसने न केवल पुलिस की नींद उड़ा दी है, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया के पीछे छिपे ‘हंटर्स’ के चेहरों पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। 18 साल की रजनी सूर्यवंशी, जिसके हाथों में कल तक सुनहरे भविष्य की किताबें थीं, उसके गले में अचानक मौत का फंदा कैसे आ गया?
खौफनाक शाम : जब ममता की चीख से दहल गया गांव – मजदूरी कर लौट रही मां को क्या पता था कि घर की दहलीज पार करते ही उसकी दुनिया उजड़ जाएगी। शाम का वह सन्नाटा तब चीख-पुकार में बदल गया जब खिड़की के झरोखे से मां ने अपनी लाडली को पंखे से झूलते देखा। घर का सन्नाटा अब एक अनसुलझी पहेली बन चुका है।
डिजिटल कत्लगाह? ‘मिस्ट्री वीडियो कॉल’ का डरावना सच – इस खुदकुशी के पीछे कोई साधारण तनाव नहीं, बल्कि एक ‘डिजिटल साजिश’ की बू आ रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है :
- आखिरी संवाद : मौत के ठीक पहले रजनी एक युवक के साथ वीडियो कॉल पर थी।
- दबाव का खेल : क्या मोबाइल की उस स्क्रीन पर उसे डराया जा रहा था? क्या कोई उसे ब्लैकमेल कर रहा था?
- खामोश गवाह : रजनी का स्मार्टफोन अब इस केस का सबसे बड़ा गवाह है, जिसके ‘कॉल लॉग्स’ और ‘डेटा’ में उस ‘कातिल कॉल’ का राज दफन है।
पुलिस की रडार पर ‘वो’ चेहरा : थाना प्रभारी जयप्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस अब उस ‘मिस्ट्री मैन’ की तलाश में है जो वीडियो कॉल के दूसरी तरफ था। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या वह लड़का रजनी को सुसाइड के लिए उकसा रहा था या उसने कुछ ऐसा दिखाया/कहा जिसने छात्रा को टूटने पर मजबूर कर दिया।
बड़ा सवाल: क्या हम अपने बच्चों को डिजिटल दुनिया के हवाले कर असुरक्षित छोड़ रहे हैं? लछनपुर की यह घटना सिर्फ एक सुसाइड नहीं, बल्कि युवाओं की असुरक्षित डिजिटल लाइफ का ‘अलार्म’ है।
अगली कार्रवाई की संभावना : पुलिस वर्तमान में साइबर सेल की मदद से रजनी के सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिलीट किए गए चैट्स को रिकवर करने की कोशिश कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक समय और परिस्थितियों पर मुहर लगेगी।



