रायगढ़

वनांचल की राहों से मिटेगा पिछड़ेपन का दाग: रायगढ़ में ₹32 करोड़ से बिछ रहा 14 सड़कों का जाल…

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विजन को कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी दे रहे धरातल पर रूप; DMF मद से बदल रही सुदूर गांवों की तकदीर…

रायगढ़। जिले के उन वनांचल क्षेत्रों में अब विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, जो वर्षों से ‘उत्खनन प्रभावित’ होने का दंश झेल रहे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप, जिला प्रशासन ने सुदूर आदिवासी क्षेत्रों की तस्वीर बदलने के लिए 32 करोड़ 12 लाख 21 हजार रुपए का भारी-भरकम बजट झोंक दिया है। जिले के धरमजयगढ़, तमनार, घरघोड़ा, लैलूंगा और खरसिया विकासखंडों में 14 महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है।

कलेक्टर के कड़े तेवर : “गुणवत्ता से समझौता नहीं, समय पर चाहिए काम” – ​हाल ही में कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने तमनार विकासखंड के पतरापाली से बरकसपाली मार्ग का औचक निरीक्षण कर स्पष्ट संदेश दे दिया है कि सरकारी फाइलों का काम धरातल पर दिखना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि तकनीकी मानकों और सामग्री की गुणवत्ता में जरा भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इन 14 सड़कों से खुलेगी खुशहाली की खिड़की : निर्माण कार्यों का यह जाल इन क्षेत्रों के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित होने वाला है:

  • धरमजयगढ़ : सेमीपाली-कोंध्रा, ससकोबा-पाराघाटी और पुसल्दा-चितापाली जैसे दुर्गम क्षेत्रों में रिटर्निंग वॉल के साथ मजबूत सड़कें बन रही हैं।
  • तमनार : पतरापाली-बरकसपाली से लेकर कांटाझरिया-सलिहारी तक 5 प्रमुख मार्ग कनेक्टिविटी को धार दे रहे हैं।
  • घरघोड़ा : तुमीडीह, कुडुमकेला और कुरुंजखोल जैसे सुदूर गांव अब मुख्य मार्ग से सीधे जुड़ेंगे।
  • लैलूंगा व खरसिया: गहनाझरिया और खड़गांव जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में पक्की सड़कों का इंतजार अब खत्म हो रहा है।

अब ‘बरसाती बाधा’ होगी अतीत की बात : ​वर्षों से इन वनांचल क्षेत्रों की नियति में बरसात के चार महीने ‘कैद’ जैसे होते थे। उबड़-खाबड़ रास्तों की वजह से न समय पर एंबुलेंस पहुंच पाती थी और न बच्चे स्कूल जा पाते थे।

बदलाव का असर :

  1. शिक्षा : छात्रों के लिए कॉलेज और स्कूल की राह होगी आसान।
  2. स्वास्थ्य : गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को समय पर मिलेगा इलाज।
  3. अर्थव्यवस्था : किसान अपनी उपज लेकर सीधे मंडियों तक पहुंच सकेंगे।

​रायगढ़ जिला प्रशासन का यह कदम केवल ‘कंक्रीट का ढांचा’ खड़ा करना नहीं है, बल्कि उन आदिवासियों के जीवन में उम्मीद की रोशनी पहुंचाना है, जो दशकों से मुख्यधारा से कटे हुए थे। डीएमएफ (DMF) मद का यह सही उपयोग जिले के आर्थिक-सामाजिक परिदृश्य को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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