सहजपाली का ‘आदर्श परिवार’ : जहाँ सरकारी खजाना ही है सरपंच पति का पर्स!…

सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में ‘पंचायती राज’ का एक ऐसा नया अध्याय लिखा गया है, जिसे पढ़कर चाणक्य भी अपनी नीतियां भूल जाएँ। ग्राम पंचायत सहजपाली की सरपंच श्रीमती सत्या ईजारदार ने नारी सशक्तिकरण और ‘पति सेवा’ का ऐसा बेजोड़ संगम पेश किया है कि सरकारी नियम भी शर्म से पानी-पानी हो गए हैं।
‘पति’ ही परम-वेंडर है! – पंचायत के नियमों में भले ही लिखा हो कि सरपंच अपने रिश्तेदारों को उपकृत नहीं कर सकते, लेकिन सहजपाली में तो “पति-सेवा ही सरकारी सेवा” है। यहाँ नाली साफ करनी हो, मास्क खरीदना हो या सड़क की मरम्मत – पंचायत को पूरे ब्रह्मांड में केवल एक ही ‘योग्य’ वेंडर मिला, और वह थे स्वयं सरपंच पति श्री घनश्याम ईजारदार।
करीब ₹1,82,887 की सरकारी राशि “PFMS” (यानी ‘पति फण्ड मैनेजमेंट सिस्टम’?) के जरिए सीधे पतिदेव के बैंक खाते में ‘होम डिलीवरी’ कर दी गई।
कोविड : भ्रष्टाचार का सबसे सुंदर बहाना – जब जाँच की आंच आई, तो सरपंच महोदया ने ‘कोविड-19’ का वह अचूक ढाल आगे कर दिया जो आजकल हर सरकारी गड़बड़ी को ढकने के काम आता है। तर्क दिया गया कि महामारी के दौर में पूरी दुनिया डर के मारे घर में छिपी थी, तब केवल ‘बहादुर’ सरपंच पति ही थे जो सरकारी पैसा लेने का “जोखिम” उठाने को तैयार हुए। सरपंच का कहना है कि उन्हें इस काम का “प्रशिक्षण” नहीं मिला था, शायद इसलिए उन्होंने अनजाने में सरकारी खजाने को संयुक्त खाता समझ लिया।
जाँच रिपोर्ट : गिरगिट भी शरमा जाए! – प्रशासनिक जाँच की कलाकारी तो और भी अद्भुत है। पहली बार में जाँच अधिकारियों ने इसे धारा 40(ग) का गंभीर उल्लंघन बताया और राशि वसूली की बात कही। लेकिन, जैसे ही दोबारा ‘मंथन’ हुआ, अधिकारियों की आँखों पर ‘सहज न्याय’ का चश्मा चढ़ गया। दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि नियम तो टूटे हैं, पर “दिल नहीं टूटा”। अधिकारियों ने इसे भ्रष्टाचार के बजाय ‘ट्रेनिंग की कमी’ बताते हुए फाइल को ही ‘नस्तीबद्ध’ करने की सिफारिश कर दी।
निष्कर्ष: वाह रे लोकतंत्र! – पंचायत राज अधिनियम की धारा 40(ग) जो कहती है कि रिश्तेदारों को आर्थिक लाभ देना अपराध है, वह सहजपाली की सीमा पर आकर शायद ‘मौन व्रत’ धारण कर लेती है।
बड़ा सवाल : अगर हर सरपंच अपने पति को ही वेंडर बना ले, तो फिर चुनाव की क्या जरूरत? सीधे ‘विवाह प्रमाणपत्र’ के आधार पर ही सरकारी ठेके क्यों नहीं बाँट दिए जाते?




