वृक्षारोपण या भ्रष्टाचार का ‘जंगल’? पत्थलगांव वन परिक्षेत्र में 51 हजार पौधों के अस्तित्व पर उठे सवाल…

पत्थलगांव: छत्तीसगढ़ के वन विभाग में पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर तलवारें खिंच गई हैं। मामला वन परिक्षेत्र पत्थलगांव के PF 1044 (बुलडेगा-टेंगरा) का है, जहां वर्ष 2024-25 के दौरान कागजों पर 51,000 पौधे रोपने का दावा किया गया था। अब इन पौधों की जमीनी हकीकत और खर्च हुए सरकारी बजट को लेकर आरटीआई (RTI) के तहत तीखे सवाल पूछे गए हैं।
RTI कार्यकर्ता के कड़े तेवर : अब बहानेबाजी नहीं चलेगी – सूचना के अधिकार के तहत दायर आवेदन में न केवल पौधों की प्रजाति-वार सर्वाइवल रिपोर्ट (जीवित संख्या) मांगी गई है, बल्कि इस पूरे प्रोजेक्ट पर हुए खर्च के बिल-वाउचरों की सत्यापित प्रतियां भी तलब की गई हैं। विभाग के भीतर होने वाले ‘कागजी वृक्षारोपण’ के खेल को उजागर करने के लिए विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण प्रतिवेदनों (Inspection Reports) की भी मांग की गई है।
BNS की धाराओं का ‘सुरक्षा घेरा’: अधिकारियों की बढ़ेगी मुश्किल – इस बार मामला सिर्फ आरटीआई की धारा 7(1) तक सीमित नहीं है। आवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि:
- यदि जानकारी छिपाई गई या भ्रामक दी गई, तो इसे RTI की धारा 20(i)(ii) के उल्लंघन के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS-2023) की धारा 198 और 240 के तहत ‘आपराधिक कृत्य’ माना जाएगा।
- यदि रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं है, तो उसे तत्काल धारा 6(3) के तहत हस्तांतरित करने का अल्टीमेटम दिया गया है, अन्यथा जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
क्या कागजों पर ही ‘हरा-भरा’ है बुलडेगा? – स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि लाखों रुपये के बजट से हुए इस वृक्षारोपण की जमीनी स्थिति दावों से उलट हो सकती है। निरीक्षण रिपोर्ट और बिल-वाउचरों के सामने आने से यह साफ हो जाएगा कि क्या वाकई 51,000 पौधे जमीन पर सांस ले रहे हैं या फिर सरकारी खजाने को ‘दीमक’ चाट गई है।
“सूचना देना अब केवल प्रशासनिक कर्तव्य नहीं, बल्कि कानूनी बाध्यता है। भ्रामक जानकारी देने पर अब सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज होने का प्रावधान है।”




