डौंडी शराब दुकान में खुलेआम भ्रष्टाचार : सेल्समैन और मैनेजर की सांठगांठ से नियमों का उल्लंघन

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/डौंडी। जिले के डौंडी नगर में स्थित शासकीय शराब दुकान अब भ्रष्टाचार का काला अध्याय बन चुकी है। यह दुकान कानून, नियम और नैतिकता को पैरों तले रौंदने का प्रतीक है, जहां संगठित अवैध वसूली और अपराध का बोलबाला है। यहां का तंत्र सुनियोजित लगता है, जिसे उच्च स्तर से चुपचाप संरक्षण मिला हुआ है। पदस्थ सेल्समैन संतोष रामटेके ‘शोले’ ब्रांड की देशी शराब को सरकारी मापदंडों से कहीं अधिक दर में बेच रहा है। शराब के लिए अतिरिक्त वसूली हो रही है, वो भी खुले काउंटर पर, बेधड़क। यह न केवल ठगी है, बल्कि राज्य के आबकारी नियमों पर करारा प्रहार है। उपभोक्ताओं को गुमराह करने के लिए ब्रांड बदलना, मात्रा में छेड़छाड़ करना— सब कुछ सुनियोजित तरीके से हो रहा है। अवैध बिक्री के लिए अलग कोड, अलग संकेत और विशेष व्यवहार अपनाया जाता है।

इस घोटाले में शासकीय शराब दुकान के मैनेजर की मिलीभगत साफ झलकती है। मैनेजर के मौजूद रहते सेल्समैन का यह खुला कारोबार असंभव है। साफ है कि मैनेजर न केवल अवैधता को संरक्षण दे रहे हैं, बल्कि इस भ्रष्ट तंत्र का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं। उनकी निष्क्रियता या सक्रिय संलिप्तता से ही यह अपराध फल-फूल रहा है। क्या वे हिस्सेदारी में लाभ ले रहे हैं? क्या अवैध कमाई का हिस्सा ऊपर तक पहुंच रहा है? ये सवाल उठना लाजमी हैं। आबकारी विभाग के निरीक्षण महज कागजी दिखावा लगते हैं— रजिस्टरों में एंट्री तो हो जाती है, लेकिन जमीनी सत्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है। निचले स्तर पर कार्यवाही का ढोंग होता है, जबकि मुख्य सूत्रधार बच जाते हैं। यह मौन सहमति भ्रष्टाचार को पनपने दे रही है।
डौंडी की यह दुकान अब मदिरा विक्रय केंद्र नहीं, अपराध का अड्डा है। प्रशासनिक लापरवाही ने इसे नग्न सच्चाई का आईना बना दिया है। सेल्समैन संतोष रामटेके और मैनेजर राजेंद्र पर तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए। यह मांग जोर पकड़ रही है। अन्यथा, आम जनता का विश्वास व्यवस्था पर हमेशा के लिए डगमगा जाएगा। आबकारी विभाग को जगना होगा, वरना यह काला धब्बा पूरे जिले के आबकारी विभाग पर कालिख पोत देगा।




