रायपुर शर्मसार: पुलिस की लापरवाही ने उजाड़ा एक घर का चिराग, तमाशबीन बनी रही व्यवस्था।…

रायपुर। राजधानी का सबसे सुरक्षित और पॉश इलाका माना जाने वाला ‘छत्तीसगढ़ क्लब’ रोड आज एक मासूम के खून से लाल हो गया। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में स्कूल बैग और आंखों में भविष्य के सपने होने चाहिए, उस उम्र को सिस्टम की एक बेलगाम ‘टोइंग गाड़ी’ ने बेरहमी से कुचल दिया।
हादसे का मंजर: चीखें और अफरा-तफरी -प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो मंजर इतना खौफनाक था कि देखने वालों की रूह कांप गई। स्कूल जा रहे दो मासूम बच्चों को ट्रैफिक पुलिस की क्रेन (टोइंग वाहन) ने इतनी जोरदार टक्कर मारी कि एक बच्चे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। दूसरी बच्ची जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल के बिस्तर पर जंग लड़ रही है। घटना के बाद आरोपी ड्राइवर अपनी संवेदनशीलता दिखाने के बजाय गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गया।
सवालों के घेरे में खाकी – यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की घोर लापरवाही है। सवाल यह उठता है कि:
- क्या नियमों का पाठ पढ़ाने वाली ट्रैफिक पुलिस के वाहनों को चलाने वाले खुद नियमों से ऊपर हैं?
- भीड़भाड़ वाले इलाकों में इन भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण क्यों नहीं है?
- क्या एक मासूम की जान की कीमत पुलिसिया कार्रवाई के चंद कागजों तक सीमित रहेगी?
वर्तमान स्थिति : पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं। हालांकि, फरार ड्राइवर की तलाश जारी है, लेकिन इस हादसे ने शहर के अभिभावकों के मन में एक गहरा डर और प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश भर दिया है।
नोट : “कानून की गाड़ी जब मासूमियत को कुचलकर आगे बढ़ जाए, तो न्याय की उम्मीदें भी लहूलुहान हो जाती हैं।”



