रोजी का झांसा, रसूख का खौफ: दुर्ग में 7 साल तक नाबालिग की अस्मत से ‘सरकारी’ खिलवाड़…

दुर्ग। यह महज एक गैंगरेप की एफआईआर नहीं है, बल्कि उस रसूख और हैवानियत के गठजोड़ का काला कच्चा चिट्ठा है जिसने एक 14 साल की बच्ची को 7 सालों तक जिंदा लाश बनाकर रखा। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से सामने आई यह दास्तान रूह कंपा देने वाली है, जहाँ ‘बेटी बचाओ’ के नारों के बीच सत्ता के गलियारों से जुड़े चेहरों और सरकारी मुलाजिमों ने एक मां की मजबूरी का सौदा उसकी बेटी की आबरू से किया।
नौकरी के नाम पर ‘सौदा’ और 7 साल का नर्क : साजिश की शुरुआत 2018 में हुई। बिलासपुर से आई एक बेबस मां को PWD क्वार्टर में झाड़ू-पोछा की नौकरी मिली, लेकिन उसे नहीं पता था कि इस ‘रोजी-रोटी’ की कीमत उसकी नाबालिग बेटी को चुकानी होगी। अप्रैल 2018 के आखिरी हफ्ते में PWD कर्मचारी गोविंद सिंह ठाकुर और राजू कश्यप ने क्वार्टर के भीतर ही पहली बार उस मासूम की चीखों को खामोश किया।
रसूखदारों का सिंडिकेट : सांसद के पूर्व PA से लेकर कारोबारी तक – लड़की जैसे-तैसे इस सदमे से उबरकर पढ़ाई की ओर लौट रही थी, लेकिन 2023 में ‘रसूख’ ने उसे फिर घेरा। इस बार जाल फेंका गया PWD में संविदा नौकरी का। पीड़िता का आरोप है कि इसमें बीएन पांडेय (सांसद विजय बघेल का कथित पूर्व पीए) ने अपना रसूख दिखाकर अफसरों पर दबाव बनाया और सर्किट हाउस व रेस्ट हाउसों के दरवाजे हैवानियत के लिए खुलवाए।
ब्लैकमेलिंग का हथियार :
- व्हाट्सएप पर न्यूड वीडियो की मांग।
- स्टाफ ग्रुप में वीडियो वायरल करने की धमकी।
- छुट्टी के हर दिन शारीरिक शोषण की ‘ड्यूटी’।
क्रूरता की हद : शादी तुड़वाने के लिए शरीर पर दांतों से घाव – दरिंदगी का यह सिलसिला दुर्ग से कवर्धा और पाटन के सरकारी रेस्ट हाउसों तक चला। कारोबारी अनिल चौधरी और विजय स्वाइन अग्रवाल जैसे नाम इस दलदल में शामिल होते गए। हद तो तब पार हो गई जब लड़की की शादी तय हुई। आरोपियों ने न केवल उसे डराया, बल्कि उसकी शादी तुड़वाने के लिए उसके शरीर पर दांतों से काटने के निशान तक बना दिए।
मंगेतर बना ‘मसीहा’, तब टूटा सन्नाटा : 7 साल तक सिस्टम और रसूखदारों के पैरों तले कुचली जा रही पीड़िता को आखिरकार उसके मंगेतर ने हिम्मत दी। जब उसने अपनी पूरी आपबीती बताई, तो मंगेतर ने समाज की परवाह किए बिना उसे न्याय की लड़ाई के लिए थाने तक पहुंचाया।
अब तक की कार्रवाई : 3 गिरफ्तार, 3 की तलाश में छापेमारी – महिला थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। अब तक 3 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश में पुलिस की टीमें यूपी और बिहार में छापेमारी कर रही हैं।
सवाल व्यवस्था पर: आखिर कैसे सरकारी दफ्तर, रेस्ट हाउस और रसूखदारों के घर सालों तक इस दरिंदगी के अड्डे बने रहे? क्या सिस्टम के रसूख के आगे एक नाबालिग की सांसें इतनी सस्ती थीं?
यह रिपोर्ट दुर्ग पुलिस की प्राथमिकी और पीड़िता के बयानों पर आधारित है।
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