रायगढ़ RTO या ‘जालसाजों’ का अड्डा? पुलिस ने पकड़ा लाखों का बाइक चोरी गिरोह, विभाग अब भी ‘कुंभकर्णी’ नींद में!…

रायगढ़। क्या छत्तीसगढ़ का परिवहन विभाग आम नागरिकों की सुरक्षा को दांव पर लगा रहा है? जब पुलिस कप्तान (SSP) शशि मोहन सिंह की टीम शहर में संगठित अपराध की जड़ें खोद रही थी, तब परिवहन विभाग के नाक के नीचे फर्जीवाड़े का एक पूरा ‘समानांतर मंत्रालय’ चल रहा था। पुलिस ने बाइक चोरी के एक ऐसे बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है जिसने विभाग की सुरक्षा प्रणालियों की धज्जियां उड़ा दीं, लेकिन अचरज की बात यह है कि इस खुलासे के बाद भी परिवहन विभाग के दफ्तरों में सन्नाटा पसरा है।
खौफनाक खेल: चेसिस नंबर वही, मालिक नया! – पुलिस की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी मुकेश चौहान और उसके साथियों ने जो खुलासा किया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। गिरोह ने सिर्फ बाइकें नहीं चुराईं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता को चुराया है। पूर्व RTO कंप्यूटर ऑपरेटर अजय पटेल ने अपनी पहुंच का फायदा उठाकर सरकारी डेटाबेस से छेड़छाड़ की। अमेजॉन से मंगाए गए PBC कार्ड्स और हाई-टेक कलर प्रिंटर्स के जरिए हूबहू असली जैसे दिखने वाले फर्जी RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) तैयार किए गए।
सवाल यह है कि एक पूर्व ऑपरेटर के पास अब भी विभाग के डेटा तक पहुंच कैसे थी? क्या विभाग के अंदर कोई ‘विभीषण’ है जो इन्हें चाबियां सौंप रहा है?
PSK सेंटर्स : सुविधा या धोखाधड़ी का केंद्र? – जिले के 24 लोक सेवा केंद्रों (PSK) की भूमिका अब संदेह के घेरे में है। कुछ सेंटर्स के सस्पेंड होने के बावजूद एजेंटों का बोलबाला कम नहीं हुआ है। फर्जी ID का इस्तेमाल कर चोरी की बाइकों को वैध बनाया जा रहा है।
- पुलिस की सक्रियता: 25 बाइकें बरामद, 16 लाख का माल जब्त, और 7 आरोपी सलाखों के पीछे।
- विभाग की उदासीनता: न कोई आंतरिक जांच, न सेंटर्स का ऑडिट, और न ही फर्जी आईडी पर लगाम।
कलेक्टर साहब! क्या अब भी जांच के आदेश का इंतजार है? – SSP शशि मोहन सिंह ने तो नागरिकों को सचेत कर दिया कि वे सेकंड-हैंड गाड़ी खरीदते समय सावधानी बरतें, लेकिन असली जिम्मेदारी तो परिवहन विभाग की है। जब पुलिस ने BNS-2023 की धारा 112(2), 317(2) और 336(3) के तहत संगठित अपराध का मामला दर्ज कर लिया है, तो विभाग अपने स्तर पर जांच अभियान क्यों नहीं चला रहा?
क्या परिवहन विभाग यह मान चुका है कि उनका काम सिर्फ टैक्स वसूलना है, सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं? अगर एजेंटों और फर्जी दस्तावेजों का यह खेल जारी रहा, तो कल को इन्हीं फर्जी कागजों पर कोई बड़ा अपराधी या आतंकी वाहन का इस्तेमाल कर सकता है। तब इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
जनता का सवाल : यह चुप्पी क्या किसी बड़ी मिलीभगत का संकेत है? क्या रायगढ़ जिला प्रशासन और कलेक्टर महोदय इस विभागीय लापरवाही पर संज्ञान लेंगे? रायगढ़ की जनता अब ‘कार्रवाई’ चाहती है, ‘आश्वासन’ नहीं।
बड़ी खबर : इस मामले में आरटीआई (RTI) के जरिए भी विभाग से जवाब मांगा गया है (आवेदन संख्या: 220260205002156), जिससे आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।




