प्रशासन के आदेश को ठेंगा : लैलूंगा में शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण जारी, तहसीलदार ने दिए कड़े निर्देश…

लैलूंगा। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा तहसील अंतर्गत ग्राम गोसाईडीह में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण का एक बड़ा मामला सामने आया है। तहसीलदार न्यायालय द्वारा ‘स्टे ऑर्डर’ (स्थगन आदेश) जारी किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य न रुकना प्रशासन की साख पर सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, मामला तूल पकड़ने के बाद अब तहसीलदार ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए निर्माण कार्य रुकवाया है और ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी है।
क्या है पूरा मामला? – प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम गोसाईडीह (पटवारी हल्का नंबर 20) में स्थित शासकीय खसरा नंबर 220 (रकबा 2.007 हेक्टेयर) पर ग्राम अंगेकेला निवासी सुरेश साहू द्वारा अवैध रूप से पक्का निर्माण कराया जा रहा है।
इस निर्माण से न केवल सरकारी भूमि का अतिक्रमण हो रहा है, बल्कि पड़ोस की निजी कृषि भूमि (खसरा नंबर 218/1/क/2) की स्वामिनी रंजना अग्रवाल का रास्ता भी अवरुद्ध हो गया है। रंजना अग्रवाल की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय तहसीलदार लैलूंगा ने प्रकरण क्रमांक 653/वाचक-1/तह./2026 के तहत दिनांक 12.01.2026 को स्पष्ट स्थगन आदेश जारी किया था।
न्यायालय के आदेश की अवहेलना : हैरानी की बात यह है कि न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य रोकने और 16 जनवरी 2026 को जवाब पेश करने के आदेश के बावजूद, मौके पर काम बंद नहीं किया गया। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माणकर्ता के हौसले इतने बुलंद हैं कि उसने प्रशासनिक आदेशों की परवाह किए बिना पक्का ढांचा खड़ा करना जारी रखा। इस पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल : शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब न्यायालय ने थाना प्रभारी लैलूंगा और राजस्व निरीक्षक (RI) को आदेश की प्रति भेजकर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए थे, तो फिर निर्माण कार्य कैसे चलता रहा? लोगों ने आरोप लगाया कि निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत या उदासीनता के कारण ही सरकारी जमीन पर बेखौफ कब्जा किया जा रहा है।
तहसीलदार का सख्त रुख : मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार लैलूंगा, शिवम पांडेय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
”स्थगन आदेश के उल्लंघन की सूचना मिलते ही मैंने स्वयं मौके पर जाकर अवैध निर्माण कार्य को बंद करा दिया है। शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जल्द ही इस अवैध पक्के निर्माण को ढहाने की कार्रवाई की जाएगी और भूमि को पूर्णतः कब्जा मुक्त कराया जाएगा।”
आगे क्या? – फिलहाल प्रशासन ने मौके पर काम रुकवा दिया है, लेकिन ग्रामीणों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कितनी जल्दी इस अवैध ढांचे को ध्वस्त करता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी बेशकीमती जमीन भू-माफियाओं के भेंट चढ़ सकती है।




