धरमजयगढ़ : जंगलों के सीने को चीरकर ‘काला सोना’ निकाल रहे खनन माफिया, प्रशासन की नाक के नीचे खेल!…

रायगढ़/धरमजयगढ़: प्रदेश के धरमजयगढ़ वन मंडल अंतर्गत बोरों रेंज से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ खनन माफियाओं ने न केवल पर्यावरण को ताक पर रख दिया है, बल्कि प्रशासन के दावों की भी पोल खोल दी है। नदी के तटों पर पोकलेन मशीनों की गर्जना और रात के अंधेरे में “काले सोने” की तस्करी ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
मशीनों से नदी का गला घोंटा, वन विभाग ‘मौन’ – ताजा मामला बोरों रेंज के जंगलों का है, जहाँ नदी किनारे भारी पोकलेन मशीनें लगाकर खुलेआम अवैध कोयला खनन किया जा रहा है। माफियाओं ने नदी के नैसर्गिक स्वरूप को बिगाड़ते हुए पत्थरों को तोड़कर रास्ता बना लिया है ताकि भारी वाहन नदी के आर-पार जा सकें। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, वन विभाग इस पूरी गतिविधि से अनजान बना बैठा है, जबकि जंगलों के बीचों-बीच नई सड़कें बना दी गई हैं।

प्रशासन की दबिश : मौके पर मची भगदड़ – स्थानीय पत्रकार की सक्रियता से जब मामला एसडीएम धरमजयगढ़ के संज्ञान में आया, तो प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम और तहसीलदार के दल-बल के साथ मौके पर पहुंचते ही खनन माफियाओं में अफरा-तफरी मच गई। अधिकांश लोग अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए, लेकिन मौके पर एक बिना नंबर की पोकलेन मशीन और तीन मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं।
”निरीक्षण के दौरान नदी तट पर गहरे गड्ढे, खनन के निशान और भारी मात्रा में डंप किया हुआ कोयला मिला है, जो इस अवैध कारोबार की भयावहता को दर्शाता है।”
सवाल : राजसात की कार्रवाई या सिर्फ कागजी खानापूर्ति? – अब सबसे बड़ा कानूनी सवाल यह उठता है कि क्या इस पोकलेन मशीन पर वन विभाग (Forest Department) कड़ी कार्रवाई करेगा या फिर इसे राजस्व विभाग (Revenue) को सौंपकर औपचारिकता पूरी की जाएगी?
वन विभाग का अधिकार क्षेत्र क्यों बनता है? – भले ही घटना स्थल राजस्व भूमि के अंतर्गत आता हो, लेकिन पोकलेन मशीन को लाने के लिए जंगलों के बीच अवैध रास्ता बनाया गया है। भारतीय वन अधिनियम (Indian Forest Act) के तहत:
- वन भूमि का अतिक्रमण : मशीन को जंगल के रास्ते ले जाना और पेड़ों को नुकसान पहुँचाना वन अपराध की श्रेणी में आता है।
- राजसात (Confiscation) की शक्ति : यदि किसी अपराध में प्रयुक्त वाहन या मशीन वन क्षेत्र से होकर गुजरी है या वन संपदा को नुकसान पहुँचाया है, तो वन विभाग के पास उसे राजसात करने का पूर्ण अधिकार है।
खनिज विभाग की एंट्री : रायगढ़ से खनिज विभाग की टीम भी मौके पर पहुँच चुकी है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि क्या वे इन मशीनों को राजसात कर एक नजीर पेश करेंगे या फिर “सीमा विवाद” (राजस्व बनाम फॉरेस्ट) में मामला उलझकर रह जाएगा।
अगला कदम और जांच के बिंदु :
- मशीन का मालिक कौन? बिना नंबर की मशीनों के असली मालिकों तक पहुँचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है।
- अधिकारियों की भूमिका : क्या वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा था?
- जब्ती की कार्रवाई : क्या प्रशासन उन मोटरसाइकिलों और पोकलेन को जप्त कर कड़ी धाराओं में केस दर्ज करेगा?
धरमजयगढ़ का यह मामला केवल अवैध खनन का नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ बलात्कार है। यदि इस बार कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में ये नदियाँ और जंगल केवल कागजों पर ही सीमित रह जाएंगे।




