खौफनाक : पत्थलगांव में ‘फर्जी फूड इंस्पेक्टर’ का आतंक, किसान को सरेराह रोका, गालियां दीं और लूट लिए 50 हजार!…थाने में शिकायत दर्ज…

जशपुर। जिले के पत्थलगांव थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ वर्दी और रसूख का डर दिखाकर एक गरीब किसान को बीच सड़क पर लूट लिया गया। खुद को ‘फूड इंस्पेक्टर’ बताने वाले एक जालसाज ने न केवल किसान के साथ मारपीट की, बल्कि उसे जेल भेजने और गांजे के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 50,000 रुपये ऐंठ लिए।

क्या है पूरा मामला? – पंगसुवा निवासी किसान रोहित कुमार बेहरा ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आपबीती सुनाई है। रोहित 6 जनवरी की शाम अपने साथी संतोष नाग के साथ पिकअप (JH-07 J-2099) में खेत से बचा हुआ 22 बोरी धान लेकर घर लौट रहा था। तभी रास्ते में एक तेज रफ्तार कार ने उनका रास्ता रोका।
गाली-गलौज और गांजे में फंसाने की धमकी – कार से उतरे प्रेम राजपूत नामक व्यक्ति ने खुद को फूड इंस्पेक्टर बताया। उसने किसान पर अवैध धान परिवहन का आरोप लगाते हुए एसडीएम और पुलिस को बुलाने का नाटक किया। जब किसान ने मिन्नतें कीं, तो आरोपी आपे से बाहर हो गया। शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने किसान को गंदी-गंदी गालियां दीं और डराते हुए कहा– “धान के साथ गांजा का भी केस बनाऊंगा, तुझे जेल जाना पक्का है।”
किस्तों में हुई वसूली : 30 हजार नकद, 20 हजार फोनपे –दहशत में आए किसान ने अपने घर से पैसे मंगवाए। आरोपी ने पहले 50 हजार की मांग की। किसान के साथी दयानंद ने घर जाकर रोहित की पत्नी से पैसे लिए और 30,000 रुपये नकद आरोपी को दिए। लेकिन लालची जालसाज का पेट इतने में नहीं भरा। उसने और पैसों के लिए किसान के साथ मारपीट शुरू कर दी। आखिर में मजबूर होकर किसान ने 20,000 रुपये ऑनलाइन (PhonePe) के जरिए आरोपी द्वारा बताए गए नंबर पर ट्रांसफर किए।
न्याय की गुहार :पैसे लूटने के बाद आरोपी ने किसान को यह कहते हुए छोड़ा कि “आज तुम्हारी जान बच गई।” इस घटना से पीड़ित किसान और उसका परिवार गहरे सदमे में है। रोहित कुमार बेहरा ने पुलिस अधीक्षक जशपुर और एसडीओपी पत्थलगांव को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा की मांग की है और लुटे गए 50,000 रुपये वापस दिलाने व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है।
बड़ा सवाल : क्या जशपुर की सड़कों पर अब किसान सुरक्षित नहीं हैं? क्या फर्जी अधिकारी बनकर सरेआम गुंडागर्दी करने वालों को कानून का खौफ नहीं रहा? अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस शातिर ‘फर्जी इंस्पेक्टर’ पर कब तक शिकंजा कसता है।



