नगर निगम रायपुर का ‘दोहरा चरित्र’ : गरीब की सीढ़ी पर बुलडोजर, रसूखदार के अवैध कब्जे को ‘मौन संरक्षण’!…

रायपुर। नगर निगम रायपुर की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर भ्रष्टाचार और पक्षपात के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला राजधानी के संतोषी नगर (जोन-6) का है, जहाँ “सरकारी गली” का हवाला देकर एक आम नागरिक की निजी सीढ़ी को जमींदोज कर दिया गया, लेकिन हैरत की बात यह है कि उसी कथित सरकारी जमीन पर अब एक रसूखदार का पक्का निर्माण खड़ा हो गया है।


यह मामला सीधे तौर पर नगर निगम के अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच ‘साठगांठ’ की ओर इशारा कर रहा है।
क्या है पूरा मामला? – पीड़ित विनय ताम्रकार के अनुसार, 22 सितंबर 2023 को जोन-6 के अधिकारियों ने बिना किसी ठोस वैधानिक प्रक्रिया के उनकी निजी सीढ़ी को यह कहकर तोड़ दिया कि वह अतिक्रमण है। पीड़ित ने निगम को लिखित जवाब (दिनांक 12/09/2024) में स्पष्ट किया था कि यदि 6 फीट की गली वास्तव में सरकारी है, तो पहले वहां मौजूद अन्य अवैध कब्जों को हटाया जाए।
लेकिन निगम ने न्याय के बजाय ‘पिक एंड चूज’ की नीति अपनाई। पीड़ित का आरोप है कि उसकी संपत्ति तोड़ने के बाद उसी “सरकारी जमीन” को अधिकारियों ने कथित तौर पर साठगांठ कर किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया, जिसने अब वहां अवैध निर्माण पूरा कर लिया है।
अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब : “हम कुछ नहीं कर सकते” – जब पीड़ित विनय ताम्रकार अपनी गुहार लेकर जोन कमिश्नर, जोन अध्यक्ष बद्री गुप्ता और क्षेत्रीय पार्षद के पास पहुंचे, तो उन्हें न्याय के बजाय बेबसी मिली। अधिकारियों का कहना है कि “हम कुछ नहीं कर सकते।”
सवाल यह उठता है कि :
- यदि जिम्मेदार अधिकारी कुछ नहीं कर सकते, तो उन्होंने किस अधिकार से सीढ़ी तोड़ी?
- क्या निगम के नियम केवल आम जनता के लिए हैं और रसूखदारों के लिए फाइलों में कैद हो जाते हैं?
- अगर जमीन सरकारी थी, तो उस पर दूसरे व्यक्ति का पक्का निर्माण कैसे हो गया?
महापौर के आश्वासन भी रहे ‘हवाई’ : पीड़ित ने अपनी व्यथा रायपुर महापौर के सामने भी रखी। 5-6 बार मुलाकात के बाद भी केवल ‘जांच का आश्वासन’ ही मिला। इस डेढ़ साल के अंतराल में कब्जाधारी ने न केवल निर्माण शुरू किया, बल्कि उसे पूरा भी कर लिया। निगम की यह सुस्ती स्पष्ट करती है कि विभाग के भीतर ही कोई है जो इस अवैध कब्जे को संरक्षण दे रहा है।
भ्रष्टाचार की गंध : “सरकारी गली” का सौदा? – पीड़ित ने सीधा आरोप लगाया है कि सरकारी गली को खाली कराकर उसे किसी और के हाथों ‘बेच’ दिया गया है। यह रायपुर नगर निगम के इतिहास में एक काला अध्याय है, जहाँ प्रशासन खुद ही अतिक्रमण हटाने के नाम पर नए अतिक्रमण को जन्म दे रहा है।
पीड़ित की मांग : डेढ़ साल से न्याय की आस में भटक रहे विनय ताम्रकार ने मांग की है कि:
- पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो।
- दोषी अधिकारियों, जिन्होंने रसूखदार को कब्जा दिलाया, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
- पीड़ित की क्षतिग्रस्त संपत्ति का उचित मुआवजा दिया जाए।
निष्कर्ष: यह घटना साबित करती है कि रायपुर नगर निगम में रसूख और पैसे के दम पर सरकारी नियमों को मोड़ा जा रहा है। यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो आम नागरिक का तंत्र से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।




