रायगढ़ में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर प्रशासन का हंटर: साल भर में ₹2.80 करोड़ की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली…

• कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई; 150 से अधिक औद्योगिक इकाइयों पर गिरी गाज, SOP उल्लंघन में लगा करोड़ों का जुर्माना…
रायगढ़ | 25 दिसम्बर 2025 छत्तीसगढ़ की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले रायगढ़ जिले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन ने अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के सख्त रुख के बाद छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) के क्षेत्रीय कार्यालय ने जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर 2,79,78,178 रुपये (लगभग 2.80 करोड़) का भारी जुर्माना लगाया है।
निरीक्षण अभियान : नियम तोड़ने वालों की खैर नहीं – क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बताया कि साल भर चले इस विशेष निगरानी अभियान का उद्देश्य वायु और जल प्रदूषण को नियंत्रित करना था। विभाग ने पाया कि कई उद्योग न केवल चिमनियों से होने वाले उत्सर्जन में लापरवाही बरत रहे थे, बल्कि जल निकासी और कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) के नियमों को भी ताक पर रख रहे थे।
इन कानूनों के तहत हुई कार्रवाई:
- वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981
- जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974
- फ्लाई ऐश अधिसूचना 2021
- परिवहन हेतु स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) – आदेश दिनांक 26.06.2024
जुर्माने का गणित : कहाँ हुई कितनी सख्ती? – पर्यावरण मंडल ने उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर दंड निर्धारित किया है। सबसे ज्यादा जुर्माना कच्चे माल और अपशिष्ट के परिवहन में बरती गई लापरवाही पर लगा है।
- SOP उल्लंघन (परिवहन): कच्चे माल, उत्पाद और अपशिष्ट के परिवहन में नियमों का पालन न करने पर 1,17,31,493 रुपये का दंड लगाया गया।
- फ्लाई ऐश की अनियमितता: राख (Fly Ash) के परिवहन में लापरवाही पर 66,54,330 रुपये और इसके अवैध डंपिंग (अपवहन) पर 34,02,355 रुपये वसूले गए।
- सम्मति शर्तों का उल्लंघन: उद्योगों को संचालन के लिए दी गई शर्तों (Consent Conditions) का पालन न करने वाली 89 इकाइयों से 61,90,000 रुपये की क्षतिपूर्ति ली गई।
दर्जनों उद्योगों को नोटिस, कइयों को कड़े निर्देश – प्रशासन ने केवल आर्थिक दंड ही नहीं लगाया, बल्कि कानूनी शिकंजा भी कसा है :
- 10 इकाइयों को वायु अधिनियम की धारा 31(क) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
- 02 इकाइयों को जल अधिनियम की धारा 33(क) के उल्लंघन का दोषी पाया गया।
- 04 बड़ी इकाइयों को जल और वायु दोनों अधिनियमों के तहत नोटिस थमाया गया है।
- इसके अलावा 11 इकाइयों को भविष्य में सुधार न होने पर तालाबंदी की चेतावनी के साथ कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रशासन का कड़ा संदेश : ‘विकास और पर्यावरण साथ-साथ’ –
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया है कि जिले के औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। क्षेत्रीय कार्यालय ने चेतावनी दी है कि जो इकाइयां अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं लाएंगी, उन्हें बंद करने (Closure) की अनुशंसा की जाएगी। सड़कों पर उड़ती धूल और उद्योगों से निकलने वाले धुएं पर विभाग की ‘इंटेलिजेंस टीम’ लगातार नजर रख रही है।
मुख्य बिंदु : एक नज़र में–
- कुल वसूली: ₹2,79,78,178/-
- प्रभावित इकाइयां: 100 से अधिक।
- सबसे बड़ी लापरवाही: कच्चे माल और कचरे का असुरक्षित परिवहन।
- भविष्य की योजना: औचक निरीक्षण और ड्रोन निगरानी में बढ़ोत्तरी।




