रायगढ़

शिक्षा की नई मिसाल : घने जंगलों के बीच ‘लामीखार शाला’ बना रोल मॉडल, कलेक्टर ने थपथपाई पीठ…

रायगढ़। जिले के सुदूर वनांचल में स्थित एक छोटे से गांव लामीखार ने शिक्षा के क्षेत्र में जो इबारत लिखी है, उसकी गूंज अब जिला मुख्यालय तक पहुँच गई है। शनिवार को कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने घरघोड़ा और धरमजयगढ़ प्रवास के दौरान शासकीय प्राथमिक शाला लामीखार का औचक निरीक्षण किया। बच्चों के आत्मविश्वास और स्कूल के नवाचारों को देखकर कलेक्टर इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे जिले के अन्य स्कूलों के लिए ‘अनुकरणीय मॉडल’ घोषित कर दिया।

कलेक्टर भी रह गए हैरान : हिंदी-अंग्रेजी में बच्चों ने दिए बेबाक जवाब – निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों से सीधा संवाद किया। वनांचल क्षेत्र होने के बावजूद जब बच्चों ने हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा में भी आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिए, तो कलेक्टर ने उनकी अभिव्यक्ति क्षमता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह शिक्षकों के समर्पण और सही मार्गदर्शन का जीवंत परिणाम है।

कबाड़ से जुगाड़ और ‘मुस्कान पुस्तकालय’ की धूम – स्कूल में शिक्षा को बोझिल नहीं, बल्कि मनोरंजक बनाया गया है। कलेक्टर ने स्कूल में निम्नलिखित नवाचारों का अवलोकन किया :

  • प्रिंट-रिच वातावरण : स्कूल की दीवारें और कोना-कोना बोलता है।
  • कबाड़ से जुगाड़ : पवन चक्की, सौर ऊर्जा मॉडल और यातायात संकेतों के माध्यम से बच्चे विज्ञान और भूगोल समझते हैं।
  • मुस्कान पुस्तकालय : यहाँ 1500 पुस्तकों का प्रबंधन बच्चे स्वयं करते हैं। इसमें ‘खुला पुस्तकालय’ और ‘चर्चा-पत्र’ जैसे अनूठे प्रयोग शामिल हैं।
  • एक दिन का गुरुजी : बच्चों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए उनके जन्मदिन पर उन्हें शिक्षक बनने का अवसर दिया जाता है।

128 किस्मों के पौधों से महक रहा ‘किचन गार्डन’ – स्कूल केवल किताबों तक सीमित नहीं है। यहाँ के परिसर में अंजीर, सेब, चंदन, मौसंबी और चकोतरा जैसे 128 किस्मों के औषधीय और फलदार पौधे लगे हैं। कलेक्टर ने किचन गार्डन और हर्बल गार्डन को पर्यावरण शिक्षा का सबसे सशक्त माध्यम बताया और इस कार्य में ग्रामीणों की सहभागिता की सराहना की।

सफलता के आंकड़े : 46 बच्चों में से 8 का प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन – आदिवासी बहुल इस गांव की कुल जनसंख्या मात्र 314 है, लेकिन यहाँ के स्कूल का परिणाम बड़े शहरों को मात दे रहा है। वर्तमान में अध्ययनरत 46 विद्यार्थियों में से 08 बच्चों का चयन वर्ष 2025 में विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के लिए हुआ है। कलेक्टर ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरव की बात बताया।

“लामीखार स्कूल ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो संसाधनों की कमी कभी शिक्षा के आड़े नहीं आती। यहाँ के नवाचारों को पूरे जिले के स्कूलों में लागू करने के प्रयास किए जाएंगे।”  श्री मयंक चतुर्वेदी, कलेक्टर, रायगढ़

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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