रायगढ़

रायगढ़ : जिले में हाथियों का ‘रोड शो’: दो दिनों से घरघोड़ा–रायगढ़ मार्ग पर 25 हाथियों का कब्ज़ा, वाहनों की लंबी कतारें थमीं…

रायगढ़। घरघोड़ा-रायगढ़ मेन रोड इन दिनों हाथियों के दबदबे में है। पिछले दो दिनों से 25 हाथियों का विशाल झुंड शाम होते ही सड़क पर उतर रहा है- नर, मादा और शावकों सहित पूरा दल। जंगल से निकलकर सड़क पर कई-कई मिनट तक ठहरना और फिर वापस जंगल की ओर लौट जाना अब रोज़ की घटना बन चुकी है। इससे सड़क के दोनों ओर जाम की स्थिति बन रही है और लोगों में भय व सतर्कता दोनों बढ़ गए हैं।

सामारूमा के जंगल से निकला झुंड, सड़क पर थमी वाहनों की लाइन : 12 नवंबर की शाम सामान्य दिनों की तरह ट्रक, डंपर, बाइक और कारों की आवाजाही जारी थी। ठीक साढ़े चार बजे सामारूमा के जंगल से 25 हाथियों का दल अचानक सड़क पर आ गया। कुछ ही मिनटों में दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्री और ड्राइवर गाड़ियों में ही रुके रहे और हाथियों की गतिविधियों को दूरी बनाकर देखते रहे। कुछ हाथी सड़क के नीचे उतरे, जबकि कई ऊपरी हिस्से पर खड़े रहे। इस दौरान लोगों ने उनका वीडियो भी बनाया, वहीं ग्रामीण हाथियों के इतने करीब आने को लेकर चिंतित दिखे।

वन अमला और ग्रामीण मौके पर पहुँचे, सुरक्षा के लिए यातायात रोका गया : सूचना मिलते ही तमनार रेंज का वन अमला और आसपास के ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुँचे। हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए दोनों ओर से वाहनों को पूरी तरह रोक दिया गया, ताकि झुंड सुरक्षित तरीके से पार हो सके। हाथी करीब आधा घंटा सड़क पर डटे रहे और उसके बाद धीरे-धीरे जंगल की ओर लौट गए।

सूत्रों के अनुसार, 11 नवंबर की शाम भी यही झुंड इसी मार्ग पर देर तक खड़ा रहा था, जिससे प्रतिदिन खतरनाक स्थिति बन रही है।

रायगढ़ में हाथियों की संख्या बढ़कर 39, 25 के झुंड में 6 नर, 14 मादा और 5 शावक : वन विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार रायगढ़ वन मंडल में हाथियों की संख्या बढ़कर 39 हो चुकी है। 12 नवंबर तक की स्थिति-

  • बंगुरसिया में: 2 हाथी
  • चारमार और कमतरा बीट में: 1-1 हाथी
  • सामारूमा (तमनार रेंज) में: 25 हाथी
  • कापरमार (खरसिया) में: 10 हाथी

सामारूमा का 25 हाथियों का यह बड़ा दल 6 नर, 14 मादा और 5 शावकों के साथ जिले में सबसे बड़ा समूह है।

वन विभाग की सतत निगरानी, तमनार रेंजर बोले – यह बॉर्डर एरिया, नियमित क्रॉसिंग पॉइंट : तमनार रेंजर के अनुसार, यह स्थान रेंज का बॉर्डर एरिया है और हाथी प्रतिदिन इसी मार्ग से वन सीमाएं पार करते हैं। “हमारी टीम लगातार निगरानी कर रही थी। दोनों ओर से यातायात रोककर हाथियों को सुरक्षित पार कराया गया,” रेंजर ने बताया।

ग्रामीणों में दहशत – शाम होते ही सड़क ‘जोखिम क्षेत्र’ में बदली : लगातार दो दिनों से हाथियों की आमद से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। सामान्यत: व्यस्त रहने वाली यह सड़क शाम के समय संभावित दुर्घटनाओं का केंद्र बन गई है। कई लोग अब इस समय इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं।

यह स्थिति केवल जंगली जीवन की उपस्थिति नहीं, बल्कि बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और हाथियों के पारंपरिक मार्गों में बाधा का गंभीर संकेत भी है।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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