बड़ी खबर : “वादों के गुब्बारे, शोषण की हवा” – एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से प्रदेश की सेहत पर संकट…

रायगढ़, 23 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था 20 साल पुराने शोषण के ढांचे पर टिके वादों के गुब्बारे अब फूटने लगे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16,000 से ज्यादा कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के छठे दिन भी सरकार से लिखित जवाब मांगते हुए सड़कों पर डटे हैं। रायगढ़ जिले के 550 से अधिक कर्मचारियों ने शनिवार को शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मिनी स्टेडियम में आसमान में रंग-बिरंगे गुब्बारे उड़ाए संदेश साफ था: “हमारी 10 सूत्रीय मांगें अब हवा में नहीं, हकीकत में चाहिएं।”
खोखले दावों का पर्दाफाश : शासन यह दावा कर रहा है कि “पांच मांगें मान ली गईं”, मगर कर्मचारी आगबबूला हैं – क्योंकि लिखित आदेश का एक भी कागज अभी तक सामने नहीं आया।
संघ का सीधा सवाल:
👉 “अगर मांगी गई मांगें मान ली गईं, तो आदेश कहां है? क्या सरकार की नीति सिर्फ हवाई बातें करना है?”
नीतियों में धांधली और कर्मचारियों का रोष : एनएचएम संघ ने सरकार से तीखे सवालों की झड़ी लगा दी
- चिकित्सा अवकाश – गंभीर बीमारी तक सीमित क्यों? जिला स्तर पर मंजूरी क्यों नहीं?
- टर्मिनेशन नीति – पारदर्शिता कहां है? पिछले साल कितनों को बिना जांच टर्मिनेट किया गया?
- स्थानांतरण नीति – रिक्त पदों की सूची छिपाई क्यों जाती है?
- कैशलेस मेडिकल सुविधा – 10 लाख की मांग पर अब तक नीति क्यों नहीं? वेलफेयर फंड में लेप्स राशि कितनी?
- ग्रेड पे – लिखित आदेश कब तक आएगा?
10 सूत्रीय मांगें जिन पर अड़ी है हड़ताल
- नियमितीकरण और स्थायीकरण
- पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
- ग्रेड पे निर्धारण
- लंबित 27% वेतन वृद्धि
- कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता
- नियमित भर्ती में आरक्षण
- अनुकम्पा नियुक्ति
- मेडिकल और अन्य अवकाश
- स्पष्ट स्थानांतरण नीति
- 10 लाख का कैशलेस बीमा
एनएचएम कर्मचारी राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। 20 साल से अनुबंध पर काम करने वाले ये कर्मचारी स्थायीकरण और सुरक्षा से वंचित हैं।
आज नतीजा यह है कि प्रदेश की 6,239 स्वास्थ्य संस्थाएं प्रभावित हो चुकी हैं। ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण से लेकर मातृ-शिशु देखभाल तक संकट गहराता जा रहा है।
संघ की चेतावनी : “सरकार लिखित में आश्वासन दे, अन्यथा हड़ताल अनवरत जारी रहेगी। जनता की सेहत पर पड़ने वाले असर की पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।”
सवाल सीधा है – क्या छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य कर्मियों को वादों के गुब्बारे थमाकर टालती रहेगी, या 20 साल के शोषण का हिसाब लिखित में देगी?