पत्थलगांव में सिस्टम का लकवा या खाकी-खादी का रसूख? पॉक्सो, जमीन कब्जा और रंगदारी के संगीन आरोपों के बीच न्याय को तरसती जनता…

भाग 5
जशपुर। सुशासन, विधि के शासन और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दावों के बीच जिले का पत्थलगांव कस्बा इस वक्त सत्ता के संरक्षण में फलते-फूलते राजनीतिक वर्चस्व का केंद्र बना हुआ है। आरोप बेहद संगीन हैं – पॉक्सो (POCSO) एक्ट, एससी/एसटी अत्याचार, महिला के घर में घुसकर मारपीट, बेशकीमती जमीन पर जबरन कब्जा और नौकरी के नाम पर अवैध वसूली। विडंबना यह है कि पुलिस डायरियों और शिकायतों के लंबे पुलिंदे के बावजूद कार्रवाई की रफ्तार इतनी सुस्त है कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पॉक्सो मामले में तारीखों का अंतहीन सिलसिला: कानून का शिकंजा या केवल औपचारिकता? – वर्ष 2022 से जुड़ा एक मामला, जिसमें वार्ड क्रमांक 12 के पार्षद और भाजपा नेता श्याम नारायण गुप्ता पर आदिवासी नाबालिग से जुड़े अत्यंत गंभीर आरोप हैं, आज भी न्याय की चौखट पर अटका हुआ है। पीड़ित परिवार पिछले चार वर्षों से न्यायालय और थानों के चक्कर काटने को विवश है। जिस पॉक्सो और एससी/एसटी कानून में त्वरित जांच व समयबद्ध न्याय का कड़ा प्रावधान है, वहां तारीख-दर-तारीख का यह विलंब प्रशासनिक मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाता है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आवाज उठाने पर रसूख के बल पर डराया-धमकाया जाता है, जबकि दर्जनभर शिकायतों के बाद भी गुंडा एक्ट जैसी निवारक कार्रवाइयों की फाइलें ठंडे बस्ते में धूल फांक रही हैं।
वार्ड 13 से लेकर एल्डरमेन तक: एक ही कुनबे का समानांतर तंत्र
स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित न होकर पूरे पारिवारिक रसूख के विस्तार का है:
- वार्ड 13 पार्षद रोशन गुप्ता : पिता पर गंभीर कानूनी आरोप हैं तो पुत्र की कार्यशैली पर भी सवाल उठते रहे हैं। थानों में दर्ज शिकायतों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, क्षेत्र में बने भय के माहौल के कारण आम नागरिक शिकायत दर्ज कराने से भी कतराता है।
- एल्डरमेन अवधेश गुप्ता : एक महिला के घर में घुसकर मारपीट करने का कथित वीडियो सामने आने और पूर्व में जेल जाने के बावजूद इस कुनबे की राजनीतिक पकड़ प्रशासनिक गलियारों में कमजोर होती नहीं दिख रही।
सीएम हेल्पलाइन 1076 भी बेअसर, 4 करोड़ रुपये की कथित जमीन डील – हालिया मामला बेशकीमती जमीन पर कब्जे और अवैध सौदेबाजी से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री जनशिकायत हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई, किंतु प्रशासनिक अनदेखी के बीच निर्माण कार्य बदस्तूर जारी रहा। स्थानीय सूत्रों के अनुसार विवादित भूमि को किसी बड़े पूंजीपति को करीब 4 करोड़ रुपये में बेचने की कवायद चल रही है। जब राज्य के शीर्ष शिकायत निवारण तंत्र की यह स्थिति है, तो आम नागरिक की सुनवाई किस स्तर पर होगी?
जनप्रतिनिधि की चुप्पी और जनता के सीधे सवाल – पत्थलगांव की जनता अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सीधे जवाब मांग रही है:
- ऐसे संगीन मामलों में नाम सामने आने के बावजूद संबंधित व्यक्तियों को राजनीतिक दल और स्थानीय निकायों में संरक्षण क्यों मिल रहा है?
- क्या क्षेत्र की माननीय विधायक की मौन सहमति इन नेताओं के बेखौफ रवैये का कारण बन रही है?
- दर्जनभर गंभीर शिकायतों और प्रमाणों के बाद भी पुलिस व प्रशासन ठोस दंडात्मक कार्रवाई से क्यों बच रहा है?
न्याय की बाट जोहती जनता आज यह पूछने को विवश है कि पत्थलगांव में संविधान और कानून का राज चलेगा या फिर रसूखदारों का दबदबा ही अंतिम व्यवस्था माना जाएगा?
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