गोल्डन बुक में रिकॉर्ड, चौक पर ‘आंखें बंद’: पत्थलगांव में पुलिस के सामने नाबालिग की ‘अदृश्य’ स्कूटी, पत्रकार ने जगाया तो खाकी ने ओढ़ी शांति की चादर!…

- एक तरफ 800 चौपालों में शपथ और वर्ल्ड रिकॉर्ड का डंका, दूसरी तरफ इंदिरा गांधी चौक पर पुलिस बूथ के आगे बिना नंबर प्लेट फर्राटा भरता नाबालिग; सिपाही जी बोले – ‘तपस्या भंग मत करो!’…
जशपुर। अगर आपको लगता है कि मोटर व्हीकल एक्ट की धाराएं और ट्रैफिक नियम सड़क पर चलने वाले हर वाहन के लिए बने हैं, तो आपको तत्काल पत्थलगांव के इंदिरा गांधी चौक पर आकर अपनी यह “गलतफहमी” दूर कर लेनी चाहिए।
यहाँ के ट्रैफिक सहायता केंद्र के ठीक सामने नियमों का ऐसा अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग देखने को मिला, जिसे देखकर शायद यातायात नियमों की किताब भी सन्यास ले ले।
तस्वीर बिल्कुल साफ थी – एक नाबालिग बच्चा स्कूटी पर सवार था। स्कूटी पर नंबर प्लेट नदारद थी। और सबसे खूबसूरत बात यह कि यह सारा रोमांचक दृश्य ठीक उस जगह घटित हो रहा था, जहां यातायात पुलिस का बाकायदा बोर्ड लगा है और खाकी वर्दी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करा रही थी।
“साहब, सामने देखिए!”… और सिपाही जी ने ध्यान लगा लिया! –प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक खोजी पत्रकार ने जब देखा कि कानून की धज्जियां बड़े सलीके से उड़ाई जा रही हैं, तो उसने मौके पर तैनात पुलिसकर्मी मनोज टोप्पो (बैच क्रमांक 540) को झकझोरा—
“साहब, आंखें खोलिए! आपके ठीक सामने नाबालिग बिना नंबर प्लेट की स्कूटी दौड़ा रहा है।”
लेकिन साहब के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। आरोप है कि सूचना एएसआई मनोज सिंह और हवलदार संतोष तक भी पहुंची, मगर कार्रवाई का पहिया ऐसा जाम हुआ कि हिलने का नाम ही नहीं लिया।
अब शहर में लोग सोच रहे हैं कि आखिर खाकी किस बात की प्रतीक्षा में मग्न थी?
- क्या पुलिस इंतजार कर रही थी कि पहले बच्चा बालिग होकर 18 साल का हो जाए, फिर कार्रवाई सोची जाए?
- या फिर इस उम्मीद में थी कि स्कूटी पर घर बैठे-बैठे ही चमत्कारी रूप से नंबर प्लेट उग आएगी?
- या शायद सिपाही जी मन ही मन सोच रहे थे – “जाने दो भाई, कहीं बच्चे का चालान काट दिया तो एसपी साहब का ‘जागरूकता वाला वर्ल्ड रिकॉर्ड’ डिस्टर्ब न हो जाए!”
800 चौपालें, 60 हजार शपथ… और जमीन पर ‘मौन व्रत’! – एक तरफ जशपुर पुलिस की भव्य प्रेस विज्ञप्तियां इतिहास रच रही हैं। डीआईजी व एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के कुशल नेतृत्व में 800 लोकेशन पर एक साथ चौपाल लगाकर ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ का तमगा हासिल किया गया है। दो दिन में 5000 लोगों को रोककर गुलाब के फूल जैसी मीठी समझाइश दी जा रही है, 60,000 लोगों को “सड़क सुरक्षा के 7 वचनों” की शपथ दिलाई जा रही है, रील प्रतियोगिताएं हो रही हैं और 50 जिंदगियां बचाने का महा-संकल्प लिया गया है।
लेकिन पत्थलगांव के इंदिरा गांधी चौक पर आकर यह सारा भव्य प्रचार ‘साइलेंट मोड’ में क्यों चला गया?
लगता है सड़क सुरक्षा के उन 7 वचनों में एक 8वां ‘गोपनीय वचन’ भी था –
“चाहे नाबालिग बिना नंबर की गाड़ी लेकर सामने से निकल जाए, अगर कोई पत्रकार टोक दे, तो कसम खाओ कि हिलना भी मत!”
गरीब की बाइक दिखे तो गिद्ध जैसी नजर, नाबालिग की स्कूटी दिखे तो मोतियाबिंद! – शहर का आम नागरिक अच्छी तरह जानता है कि अगर किसी मजदूर या मध्यमवर्गीय व्यक्ति की बाइक पर हेलमेट न हो, या नंबर प्लेट थोड़ी टेढ़ी हो, तो पुलिस की नजरें चील से भी तेज हो जाती हैं। तुरंत डंडा खिंच जाता है और रसीद कट्टा फड़फड़ाने लगता है।
लेकिन जब शहर के दिल यानी इंदिरा गांधी चौक पर एक नाबालिग खुलेआम कानून का मखौल उड़ाता है, तो वही चौक ‘नो-एक्शन जोन’ घोषित हो जाता है।
अब जनता पूछ रही है कि क्या जशपुर पुलिस का यह ‘जागरूकता महा-अभियान’ सिर्फ शरीफों को रोककर शपथ पत्र भरवाने और सेल्फी खिंचवाने तक सीमित है? या फिर नाबालिगों को सड़क पर यमराज का दूत बनने की छूट देना भी इसी ‘व्यवहार परिवर्तन’ अभियान का हिस्सा है?
खैर, देखना दिलचस्प होगा कि खबर के बाद पत्थलगांव का ट्रैफिक अमला नींद से जागता है, या फिर इस मामले को भी यह कहकर रफा-दफा कर दिया जाएगा कि—
“बच्चा बहुत प्यार से स्कूटी चला रहा था, इसलिए हमने उसे मन ही मन हेलमेट पहनाकर जाने दिया!”
सफेद झूठ और कागजी दावों के बीच नोट : संबंधित पुलिसकर्मियों का औपचारिक पक्ष अभी भी प्रतीक्षित है। यदि वे बताना चाहें कि उस वक्त वे कौन सी ‘समाधि’ में लीन थे, तो उनका बयान भी पूरे सम्मान के साथ छापा जाएगा।




