कोतासुरा में झोलाछाप इलाज का काला सच : सरपंच प्रतिनिधि दिलीप माली पर बिना डिग्री मरीजों की हड्डियों से खिलवाड़ का गंभीर आरोप…

रायगढ़। जिले के पुसौर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कोतासुरा में मानवता को शर्मसार करने वाला और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाला एक बेहद संगीन मामला सामने आया है। यहां ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि दिलीप माली द्वारा बिना किसी वैध चिकित्सा डिग्री और पंजीयन के, सीधे तौर पर मासूम ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
फर्जी इलाज का घटिया खेल : जड़ी-बूटी और तेल के नाम पर लूट और बर्बादी – ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, दिलीप माली बिना किसी चिकित्सकीय पात्रता के हड्डियों और नसों के इलाज के नाम पर एक बड़ा अवैध धंधा चला रहा है। आरोप है कि वह इस फर्जीवाड़े के जरिए मरीजों से 2,000 से 3,000 रुपये तक की मोटी फीस वसूलता है और बदले में सिर्फ बांस की पत्तियां, जड़ी-बूटियां, तेल और क्रैक बैंडेज थमाता है।
लापरवाही की इंतहा : टूटी हड्डियों को खींचकर पहुंचाया अपाहिज जैसी स्थिति में – मामला सिर्फ अवैध प्रैक्टिस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गंभीर लापरवाही और शारीरिक उत्पीड़न का रूप ले चुका है:
- जानलेवा तरीके से खींचतान : क्रैक हुई हड्डियों को वैज्ञानिक तरीकों से जोड़ने के बजाय जोर-जोर से खींचकर बांधने के कारण कई मरीजों की हड्डियां पूरी तरह टूट चुकी हैं।
- मरीजों पर आर्थिक और शारीरिक प्रहार : स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई पीड़ितों को मजबूरन बड़े अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी। वहां उन्हें सर्जरी करवाकर रॉड और प्लेट डलवानी पड़ी, जिससे उन्हें भारी-भरकम आर्थिक नुकसान और असहनीय शारीरिक पीड़ा उठानी पड़ी।
पद का दुरुपयोग : सरपंच प्रतिनिधि की आड़ में बेखौफ खेल – हैरानी की बात यह है कि आरोपी दिलीप माली खुद ग्राम पंचायत का सरपंच प्रतिनिधि है। अपने रसूख और पद की आड़ में वह कानून को ठेंगा दिखाकर बेखौफ यह गैर-कानूनी धंधा चला रहा है। डर के कारण कई ग्रामीण खुलकर सामने आने से बच रहे हैं, लेकिन अंदरखाने में रोष उफान पर है।
ग्रामीणों की दो टूक मांग : स्वास्थ्य विभाग और CMHO तत्काल करें कार्रवाई – इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और जिला प्रशासन से निम्नलिखित सख्त कदम उठाने की मांग की है:
- डिग्री और पंजीयन की सघन जांच : दिलीप माली की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और इलाज करने की वैधानिक पात्रता की तत्काल उच्चस्तरीय जांच हो।
- लापरवाही की निष्पक्ष समीक्षा : जिन मरीजों को फर्जी इलाज के कारण शारीरिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, उनके मामलों की तकनीकी जांच की जाए।
- कड़ी कानूनी कार्रवाई : जांच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ बिना योग्यता चिकित्सा करने और मरीजों की जिंदगी खतरे में डालने के जुर्म में तुरंत एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।




