
कोरबा / रायपुर : घुटने की मामूली खरोंच का इलाज कराने पहुंचे 28 वर्षीय मजदूर को झोलाछाप के एक जहरीले इंजेक्शन और छत्तीसगढ़ के लचर स्वास्थ्य ढांचे की संवेदनहीनता ने हमेशा के लिए खामोश कर दिया। कोरबा जिले के बेंदलकोना निवासी हर प्रसाद सोनवानी की मौत ने न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में धड़ल्ले से चल रही अवैध क्लीनिकों की पोल खोली है, बल्कि प्रदेश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों—एम्स और मेकाहारा की बदहाली को भी बेनकाब कर दिया है।
पूरा घटनाक्रम: हादसे से मौत तक की दर्दनाक दास्तान –
- सड़क पर मामूली हादसा : रक्षाबंधन के आसपास हर प्रसाद सोनवानी बाइक से जा रहा था। रास्ते में आवारा कुत्ते को बचाने के चक्कर में वह गिरा और घुटने में हल्की चोट आई। परिवार में वह अकेला कमाने वाला था, जिसके सिर पर पत्नी और दो मासूम बच्चों की जिम्मेदारी थी।
- झोलाछाप का ‘कातिल’ इंजेक्शन : इलाज के लिए हर प्रसाद उरगा थाना क्षेत्र के तरदा गांव में किराए के कमरे में क्लिनिक चलाने वाले मुरली मनोहर उर्फ ‘महाराज’ के पास गया। कथित डॉक्टर ने मरीज के घुटने के बजाय बाईं कमर में इंजेक्शन ठोक दिया।
- दो दिन में फैला जहर : इंजेक्शन लगने के 48 घंटे के भीतर कमर में असहनीय दर्द, सूजन और नीला निशान पड़ गया। हालत बिगड़ने पर परिजन 2 सितंबर को कोरबा मेडिकल कॉलेज पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने इंजेक्शन की वजह से भीषण संक्रमण (सीवियर इन्फेक्शन) फैलने की पुष्टि की।
- साजिश और रेफरल का खेल : मामले की भनक लगते ही आरोपी झोलाछाप खुद मेडिकल कॉलेज पहुंचा और बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीज को टीपी नगर स्थित एक निजी अस्पताल में शिफ्ट करा दिया। जब स्थिति पूरी तरह हाथ से निकल गई, तो डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर रायपुर रेफर कर दिया।
संवेदनहीन सिस्टम : राजधानी के सबसे बड़े अस्पतालों ने कहा – ‘बेड नहीं है’ – गंभीर रूप से सड़ रहे संक्रमण और असहनीय दर्द से जूझते हर प्रसाद को लेकर परिजन 9 सितंबर को राजधानी रायपुर पहुंचे:
- एम्स रायपुर (AIIMS) : देश के प्रतिष्ठित संस्थान ने मरीज की नाजुक स्थिति देखने के बावजूद ‘बेड खाली नहीं है’ कहकर भर्ती करने से साफ मना कर दिया।
- मेकाहारा (डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल) : प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के दरवाजे भी इस गरीब मजदूर के लिए बंद रहे। यहां भी ‘बेड नहीं है’ का रटा-रटाया बहाना बनाकर मरीज को लौटा दिया गया।
मजबूर परिजन जिंदगी और मौत से जूझते हर प्रसाद को लेकर वापस कोरबा लौटे। 22 सितंबर को उसे दोबारा कोरबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां 14 दिनों तक चले संघर्ष के बाद 5 अक्टूबर को उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों की चीख : “क्लिनिक सील हो, फर्जी डॉक्टर सलाखों के पीछे पहुंचे” – मृतक के बड़े भाई जागेश्वर प्रसाद सोनवानी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा :
“बाइक से गिरने पर भाई को सिर्फ मामूली खरोंच आई थी। झोलाछाप डॉक्टर के गलत इंजेक्शन ने उसका शरीर सड़ा दिया और उसकी जान ले ली। प्रशासन तुरंत उस अवैध क्लिनिक को बुलडोज करे और आरोपी पर हत्या का मुकदमा दर्ज करे।”
पुलिस कार्रवाई : आरोपी क्लीनिक बंद कर फरार, मोबाइल भी बंद – घटना के बाद से कथित डॉक्टर मुरली मनोहर उर्फ महाराज क्लिनिक पर ताला लगाकर फरार है। उसका मोबाइल नंबर भी लगातार बंद आ रहा है।
“मेडिकल कॉलेज अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर मर्ग कायम किया गया है। शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं। पीएम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सटीक चिकित्सीय कारणों के आधार पर आगे की कड़ी कानूनी धाराएं जोड़ी जाएंगी। फरार आरोपी की तलाश में पुलिस टीमें जुटी हैं।”
आस्था शर्मा, थाना प्रभारी, सिविल लाइन
सुलगते सवाल :
- स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे किराए के मकान में ‘यमराज’ बनकर क्लिनिक चला रहे झोलाछापों पर नियमित कार्रवाई क्यों नहीं होती?
- आपातकालीन स्थिति में पहुंचे एक गंभीर मरीज को एम्स और मेकाहारा जैसे शीर्ष संस्थानों से सीधे ‘नो बेड’ कहकर लौटा देना क्या सीधे तौर पर चिकित्सकीय लापरवाही नहीं है?
- एक गरीब मजदूर की मौत के बाद बेसहारा हुई उसकी पत्नी और दो अनाथ बच्चों की जवाबदेही कौन लेगा?




