सरगुजा में सच दिखाने की कीमत : आदिवासियों और गरीबों की आवाज उठाने वाले पत्रकारों का चरित्र हनन; धर्म की आड़ में मॉब लिंचिंग की रची जा रही साजिश?…

अंबिकापुर। पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र सरगुजा में रसूखदारों, भू-माफियाओं और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ बेबाक आवाज उठाने वाले पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जुबान बंद करने के लिए एक बेहद खतरनाक और सुनियोजित षड्यंत्र सामने आया है। जब कलम और डिजिटल साक्ष्यों ने सत्ता व पैसे के दम पर कानून को दबाने वालों की चूलें हिला दीं, तो विरोधियों ने पत्रकारों की खबरों का तथ्यपरक जवाब देने के बजाय उनके निजी जीवन, चरित्र और धर्म को हथियार बना लिया है।
इस संगठित अभियान को लेकर होली क्रॉस वुमेंस कॉलेज, अंबिकापुर के कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष एवं डिजिटल फॉरेंसिक शोधार्थी असिस्टेंट प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी ने साथी पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों के नाम खुला पत्र जारी कर इस आपराधिक गठजोड़ को बेनकाब किया है।
रेप केस दबाने की नापाक कोशिश से भड़का पूरा विवाद – इस पूरे सुनियोजित डिजिटल हमले का तात्कालिक कारण अंबिकापुर के चर्चित ‘अनुपम वस्त्रालय’ से जुड़ा प्रकरण है। जहां एक गरीब आदिवासी मजदूर महिला ने संस्थान के संचालक कौशल केडिया पर बलात्कार का गंभीर आरोप लगाया। आरोप है कि रसूख के प्रभाव में पहले तो मामले में कमजोर धाराएं लगाई गईं, आरोपी का नाम गलत दर्ज कर उसे थाने से छोड़ दिया गया और तत्कालीन विवेचक प्रधान आरक्षक राजेश चतुर्वेदी द्वारा पीड़िता पर समझौते का अनैतिक दबाव बनाया गया।
जब यह मामला पुलिस महानिरीक्षक (IG) सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के संज्ञान में लाया गया, तो प्राथमिक जांच के बाद दोषी प्रधान आरक्षक को तत्काल निलंबित किया गया और पीड़िता का पूरक बयान दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।
इसके बाद कैट (CAIT) के प्रदेश उपाध्यक्ष रवीन्द्र तिवारी आरोपी के समर्थन में खुलकर सामने आए और उन्होंने न केवल पीड़िता के चरित्र पर अनर्गल लांछन लगाया, बल्कि समूची आदिवासी महिलाओं को लेकर बेहद आपत्तिजनक बयान दिया। इस पक्षपातपूर्ण रवैये और सच्चाई को जब पत्रकारों ने उजागर किया, तब से उनके खिलाफ सुनियोजित चरित्र हनन का अभियान छेड़ दिया गया।
सवालों से घिरे रसूखदार, निशाने पर आए कलमकार – पत्र में उल्लेख किया गया है कि आदिवासियों और शोषितों के हक में आवाज उठाने वाले पत्रकारों को लंबे समय से इसी प्रकार प्रताड़ित किया जा रहा है:
- पत्रकार जितेंद्र जायसवाल : आदिवासियों की जमीन वापसी और पंकज बेक कस्टोडियल डेथ जैसे गंभीर मामलों को उठाने वाले इस पत्रकार पर पूर्व में 10-11 एफआईआर दर्ज कराई गईं और अब उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर गरिमाहीन फोटो व व्यक्तिगत पोस्ट कर निशाना बनाया जा रहा है।
- आकांक्षा टोप्पो (पत्रकार व इन्फ्लुएंसर ) : समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों की आवाज बनने पर इनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कराई गईं और अब फर्जी मामलों में फंसाने की धमकियों के साथ सोशल मीडिया पर घिनौने चारित्रिक हमले किए जा रहे हैं।
- पत्रकार अमित पांडे : जशपुर-पत्थलगांव क्षेत्र में आदिवासी मुद्दों को उठाने पर एक पुराने राजनीतिक आवेदन के आधार पर उन पर एससी/एसटी एक्ट समेत कई अनुचित धाराएं थोप दी गईं।
- अकील अहमद अंसारी (असिस्टेंट प्रोफेसर व एक्टिविस्ट ): साइबर फॉरेंसिक के जरिए नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म, अग्निकांड और फर्जी रजिस्ट्री घोटालों के खुलासे में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अकील अंसारी के खिलाफ उनके 17 वर्ष पुराने निजी जीवन के उस मामले को उछाला गया, जो उच्च न्यायालय बिलासपुर से 2015 में ही समाप्त हो चुका था। इसे धार्मिक रंग देकर ऐसा उन्मादी माहौल बनाया जा रहा है, जिससे मॉब लिंचिंग जैसी गंभीर घटना घट सके।
सोशल मीडिया ट्रोलिंग या संगठित आपराधिक षड्यंत्र? – दस्तावेजों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ता धीरज सिंह एवं गौतम सिंह चौहान अपने सोशल मीडिया हैंडल से लगातार भ्रामक पोस्टर, अनर्गल आरोप और धार्मिक वैमनस्यता भड़काने वाली पोस्ट कर रहे हैं।
इन पोस्टों में भाजपा के जिला अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया को लगातार टैग किया जा रहा है और वे इन्हें लाइक भी कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भारत सिंह सिसोदिया के खिलाफ पूर्व में धारा 420, 34 के तहत एफआईआर (क्र. 482/2025) दर्ज हो चुकी है और एक रिश्वत कांड का ऑडियो वायरल हुआ था, जिसे इन्हीं पत्रकारों ने जनता के सामने उजागर किया था। ऐसे में साफ प्रतीत होता है कि अलग-अलग घोटालों में बेनकाब हुए रसूखदार, भू-माफिया और राजनीतिक चेहरे अब एक मंच पर आकर पत्रकारों की आवाज घोंटने का काम कर रहे हैं।
सर्व आदिवासी समाज का आक्रोश; निष्पक्ष जांच की उठी मांग – इस गंभीर घटनाक्रम को लेकर सर्व आदिवासी समाज (महिला प्रकोष्ठ) की जिला अध्यक्ष सुनीता सोनहा ने भी 21 सितंबर 2026 को आईजी सरगुजा दीपक कुमार झा को लिखित शिकायत सौंपकर आदिवासियों की लड़ाई लड़ने वाले पत्रकारों व एक्टिविस्टों को सुरक्षा देने की मांग की है।
सर्व आदिवासी समाज का आक्रोश; निष्पक्ष जांच की उठी मांग – इस गंभीर घटनाक्रम को लेकर सर्व आदिवासी समाज (महिला प्रकोष्ठ) की जिला अध्यक्ष सुनीता सोनहा ने भी 21 सितंबर 2026 को आईजी सरगुजा दीपक कुमार झा को लिखित शिकायत सौंपकर आदिवासियों की लड़ाई लड़ने वाले पत्रकारों व एक्टिविस्टों को सुरक्षा देने की मांग की है।
पत्रकारों एवं एक्टिविस्टों ने पत्रकार सुरक्षा समिति और शासन-प्रशासन के समक्ष प्रमुख मांगें रखी हैं:
- अनुपम वस्त्रालय मामले में आरोपी कौशल केडिया पर न्यायोचित धाराओं के तहत त्वरित गिरफ्तारी हो।
- आदिवासी महिलाओं और पीड़िता पर अपमानजनक बयान देने वाले कैट उपाध्यक्ष रवीन्द्र तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
- धीरज सिंह, गौतम सिंह चौहान सहित पर्दे के पीछे से अभियान चला रहे नेताओं व रसूखदारों के डिजिटल फुटप्रिंट्स, टैगिंग, पोस्टिंग क्रोनोलॉजी की साइबर फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
- धार्मिक उन्माद और हिंसा भड़काने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बीएनएस (BNS) और आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत दंडात्मक व सामग्री हटाने की कार्रवाई की जाए।
- पत्रकार अमित पांडे के खिलाफ दर्ज मुकदमे की स्वतंत्र सीआईडी (CID) जांच कराई जाए।
- छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस संस्थागत तंत्र विकसित किया जाए।
यदि किसी पत्रकार की रिपोर्टिंग पर आपत्ति है, तो उसके लिए विधिक रास्ते और प्रेस काउंसिल जैसे वैधानिक मंच उपलब्ध हैं। किंतु तथ्यों का मुकाबला करने के बजाय पत्रकारों के धर्म, निजी जीवन और महिलाओं की अस्मिता पर हमला करना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बंधक बनाने की खतरनाक कोशिश है।




