रायपुर

रेरा चेयरमैन संजय शुक्ला पर PMO का ‘हंटर’ : 300 करोड़ की संपत्ति और घूसकांड में घिरे, अब उल्टी गिनती शुरू!…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की नौकरशाही में दशकों तक रसूख रखने वाले और वर्तमान रेरा चेयरमैन संजय शुक्ला की मुश्किलें अब राजधानी रायपुर से निकलकर दिल्ली के गलियारों तक पहुँच गई हैं। सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद भी पद पर जमे शुक्ला के खिलाफ अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।

PMO का ‘एक्शन मोड’ : मंत्रालय और विभाग अलर्ट – ​पीएमओ ने इस गंभीर मामले में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को जांच के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। चूंकि रेरा राज्य सरकार के अधीन आता है, इसलिए केंद्रीय मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग को मामले की तह तक जाकर आवश्यक कार्रवाई करने और शिकायतकर्ता को सूचित करने का जिम्मा सौंपा है।

शिकायत में संगीन आरोप : भ्रष्टाचार का ‘महाजाल’? – भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेश चंद्र गुप्ता की शिकायत ने इस पूरे मामले में बारूद का काम किया है। शिकायत के मुख्य बिंदु किसी भी प्रशासनिक ढांचे को हिला देने के लिए काफी हैं :

  • अघोषित संपत्ति : कथित तौर पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी और अवैध संपत्ति जुटाने का आरोप।
  • प्रशासनिक दुरुपयोग : पद का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर घोटालों को अंजाम देना और साक्ष्यों को प्रभावित करना।
  • हाई-लेवल सिंडिकेट : केवल संजय शुक्ला ही नहीं, बल्कि पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व रेरा चेयरमैन विवेक ढांढ पर भी शुक्ला को संरक्षण देने और भ्रष्टाचार को कवर-अप करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सीबीआई की चार्जशीट और ‘रसूख’ की ढाल – ​गौरतलब है कि रावतपुरा मेडिकल कॉलेज घूसकांड में सीबीआई ने संजय शुक्ला को बाकायदा आरोपी मानते हुए चार्जशीट पेश कर दी है। सामान्यतः ऐसे मामलों में पद से हटा दिया जाता है, लेकिन शुक्ला अब भी अपनी कुर्सी पर बरकरार हैं। जानकार इसे ‘सत्ता के संरक्षण’ और ‘प्रशासनिक रसूख’ का परिणाम मान रहे थे, जिस पर अब पीएमओ की नजर टेढ़ी हो गई है।

क्या होगा अगला कदम? – ​पीएमओ के निर्देश के बाद अब गेंद छत्तीसगढ़ शासन के पाले में है।

  • विभागीय जांच : नगरीय प्रशासन विभाग को अब भ्रष्टाचार के इन आरोपों पर फाइल खोलनी होगी।
  • पद से रवानगी : केंद्र के दबाव के बीच राज्य सरकार के लिए शुक्ला को पद पर बनाए रखना अब राजनीतिक और नैतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।
  • एजेंसियों का शिकंजा : सीबीआई के बाद अब अन्य जांच एजेंसियां भी शुक्ला की संपत्तियों की कुंडली खंगाल सकती हैं।

विपक्ष का तंज : “जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और सीबीआई की चार्जशीट के बाद भी सरकार मौन रहे, तो न्याय की उम्मीद केवल दिल्ली (PMO) से ही की जा सकती है।”

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!