जशपुर जिला अस्पताल में ‘बदतमीजी’ पर कड़ा प्रहार : सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही ऑपरेटर को नोटिस, सिविल सर्जन ने मांगा 5 दिन में जवाब…

जशपुर। सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के साथ होने वाला दुर्व्यवहार अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जशपुर जिला चिकित्सालय से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ आयुष्मान कार्ड काउंटर पर तैनात ऑपरेटर मोती चौहान द्वारा परिजनों से अभद्रता करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऑपरेटर को ‘कारण बताओ नोटिस’ थमा दिया है।
क्या है पूरा मामला? – बीती 8 अप्रैल को फेसबुक पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक लाचार मरीज आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेने के लिए सुबह से काउंटर के चक्कर काट रहा था। मदद करने और रास्ता दिखाने के बजाय, ऑपरेटर मोती चौहान ने मरीज के परिजनों पर चिल्लाना शुरू कर दिया और उनके साथ बेहद अमर्यादित व्यवहार किया।
‘सिविल सेवा नियमों’ की उड़ी धज्जियाँ – सिविल सर्जन द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि एक शासकीय कार्यालय में सेवा देते हुए ऐसा व्यवहार छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का खुला उल्लंघन है। नोटिस में तल्ख लहजे में कहा गया है कि :
“शासकीय सेवा में रहते हुए ऐसा व्यवहार कदापि स्वीकार्य नहीं है। आपसे मर्यादित और संवेदनशील आचरण की अपेक्षा की जाती है, जिसका आपने पालन नहीं किया।”
5 दिन की मोहलत, वर्ना गिरेगी गाज – अस्पताल प्रबंधन ने ऑपरेटर को अपना पक्ष रखने के लिए 5 दिनों का समय दिया है। उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या तय समय सीमा में नहीं दिया गया, तो विभाग उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा।

अस्पताल की साख पर सवाल – इस घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जहाँ सरकार ‘आयुष्मान योजना’ के जरिए गरीबों को राहत देने का दावा करती है, वहीं ऐसे कर्मचारी अपनी बदतमीजी से सरकार की योजनाओं और अस्पताल की छवि को धूमिल कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस नोटिस के बाद अस्पताल प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।




