रायगढ़

रायगढ़ – हाईकोर्ट की अवमानना भारी पड़ी: जस्टिस बीडी गुरु ने फैमिली कोर्ट के आदेश को किया निरस्त, जज को थमाया ‘कारण बताओ’ नोटिस….

रायगढ़: न्यायपालिका के पदानुक्रम और ‘स्टे ऑर्डर’ की मर्यादा को दरकिनार करना रायगढ़ फैमिली कोर्ट के प्रेसीडिंग ऑफिसर को भारी पड़ गया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल फैमिली कोर्ट के आदेश को अवैध घोषित कर रद्द (Set Aside) कर दिया है, बल्कि संबंधित न्यायाधीश के खिलाफ कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब तलब किया है।

क्या है पूरा मामला?– मामला रायगढ़ फैमिली कोर्ट से जुड़ा है, जहाँ एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट स्टाफ और विपक्षी पार्टी के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए केस को दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि उसे निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है, क्योंकि उसे जानबूझकर परेशान किया जा रहा है और छोटी-छोटी तारीखें दी जा रही हैं।

स्टे के बाद भी सुनवाई : ‘न्यायिक अनुशासन’ की धज्जियां उड़ीं

​हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 मार्च 2026 को निचली अदालत की कार्यवाही पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी थी। लेकिन, हैरानी की बात यह रही कि:

  • अवमानना : स्टे आदेश की जानकारी होने के बावजूद प्रेसीडिंग ऑफिसर ने उसी दिन (10 मार्च) और फिर 12 मार्च को केस की सुनवाई जारी रखी।
  • विवादास्पद फैसला : रोक के बावजूद जज ने न केवल भरण-पोषण (Maintenance) का आदेश पारित किया, बल्कि याचिकाकर्ता के खिलाफ तीखी टिप्पणियां भी कीं।

“जब हाईकोर्ट रोक लगा दे, तो ट्रायल कोर्ट का पेन रुक जाना चाहिए” – ​जस्टिस बीडी गुरु ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जैसे ही उच्च न्यायालय किसी कार्यवाही पर स्थगन (Stay) आदेश देता है, निचली अदालत का उस मामले पर अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) तत्काल समाप्त हो जाता है। स्टे के बाद की गई कोई भी कार्यवाही शून्य और अवैध मानी जाएगी।

हाईकोर्ट का कड़ा हंटर: रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश – ​हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रशासनिक सख्ती दिखाते हुए निम्नलिखित आदेश दिए हैं:

  • आदेश निरस्त : 10 और 12 मार्च 2026 को फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए सभी आदेशों को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया गया है।
  • स्पष्टीकरण : हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित प्रेसीडिंग ऑफिसर से 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगें कि ‘स्टे के बावजूद आदेश क्यों पारित किया गया?’
  • चीफ जस्टिस को रिपोर्ट : यह स्पष्टीकरण रिपोर्ट प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिससे जज पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की गाज गिर सकती है।

ट्रांसफर याचिका हुई निराकृत – सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित प्रेसीडिंग ऑफिसर का तबादला हो चुका है और वहां नए अधिकारी ने कार्यभार संभाल लिया है। इस बदलाव के कारण हाईकोर्ट ने ट्रांसफर याचिका को अब ‘निरर्थक’ मानते हुए निराकृत कर दिया, लेकिन जज की कार्यप्रणाली पर जांच जारी रखने का फैसला सुनाया।

नतीजा : यह फैसला उन सभी निचली अदालतों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि न्यायिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!