रायगढ़

लैलूंगा में ‘सिस्टम’ का सरेंडर ! कांग्रेसी विधायक का सदन में हल्लाबोल, भाजपा सरकार के ‘सुशासन’ पर ‘अफसरशाही’ की कालिख!…

रायगढ़/रायपुर। छत्तीसगढ़ की सत्ता बदलते ही सुशासन के दावे तो बड़े-बड़े किए गए, लेकिन धरातल पर ‘अधिकारी राज’ आज भी जनता और जन प्रतिनिधियों पर भारी पड़ता दिख रहा है। ताज़ा मामला रायगढ़ के लैलूंगा का है, जहाँ कांग्रेस विधायक श्रीमती विद्यावती सिदार ने भाजपा सरकार के राज में प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक का आरोप है कि जनपद के अफसर न तो सरकार की सुन रहे हैं और न ही जनता के हक का पैसा जारी कर रहे हैं।

विपक्ष का वार : “क्या यही है भाजपा का सुशासन?” – कांग्रेस विधायक विद्यावती सिदार ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए सीधे मुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री को घेरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा के अंतर्गत वर्ष 2021 से अब तक करोड़ों का भुगतान लंबित है। विधायक ने तंज कसते हुए सवाल उठाया है कि क्या विपक्षी क्षेत्र होने के कारण लैलूंगा की जनता को सजा दी जा रही है? या फिर भाजपा सरकार में बैठे अफसरों को खुली छूट मिल गई है कि वे जब चाहें विकास कार्यों की फाइलें दबा दें?

RM24 एक्सक्लूसिव : सवालों से घिरीं CEO प्रीति नायडू, चुप्पी ने खोली पोल! – जब इस गंभीर मामले पर RM24 की टीम ने लैलूंगा CEO प्रीति नायडू का पक्ष जानने की कोशिश की, तो उन्होंने ‘मौन व्रत’ धारण कर लिया। बार-बार फोन करने के बावजूद मैडम CEO ने कॉल रिसीव नहीं किया।

सत्ता और सिस्टम का गठजोड़?

मामला दिलचस्प है—विधायक विपक्ष (कांग्रेस) की हैं, सरकार सत्तापक्ष (भाजपा) की है और बीच में फंसा है प्रशासन। CEO का फोन न उठाना यह संकेत देता है कि अधिकारी शायद यह मान चुके हैं कि उन्हें जनता या विपक्ष को कोई जवाब देने की जरूरत नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि क्या भाजपा सरकार अपने ही अधिकारियों की इस ‘तानाशाही’ को मौन स्वीकृति दे रही है?

सरपंचों की ‘बलि’, अफसरों की ‘मस्ती’ – विधायक सिदार ने सदन में जो दर्द बयां किया, वह चौंकाने वाला है। भुगतान न होने की वजह से सप्लायरों ने सरपंचों का जीना दूभर कर दिया है।

  • कागजी घोड़े: CEO कार्यालय से जवाब आता है कि “कार्य पूर्ण है”, लेकिन तिजोरी का ताला नहीं खुल रहा।
  • अंधेर नगरी: प्रमुख सचिव के सख्त आदेश (21/01/2026) के बाद भी भुगतान रोकना सीधा ‘राजद्रोह’ जैसा है।

RM24 के ‘धारदार’ सवाल :

  • भाजपा सरकार से: क्या आपकी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लैलूंगा जनपद की सीमा पर आकर खत्म हो जाती है?
  • कलेक्टर रायगढ़ से: जब विधायक सदन में शिकायत कर रही हैं और CEO मीडिया का फोन नहीं उठा रही हैं, तो क्या इसे ‘प्रशासनिक अराजकता’ नहीं माना जाना चाहिए?
  • CEO लैलूंगा से: फोन से भागकर आप बच सकती हैं, लेकिन उन सरपंचों के आक्रोश का क्या होगा जो आपकी मेज की धूल फांक रहे हैं?

एक तरफ कांग्रेस विधायक का आक्रामक तेवर है, दूसरी तरफ भाजपा सरकार की साख दांव पर है, और तीसरी तरफ वो लापरवाह अफसर हैं जो फोन उठाकर जवाब देना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। RM24 इस मामले की तह तक जाएगा, जब तक लैलूंगा के मजदूरों और सप्लायरों के पसीने की कमाई का एक-एक पैसा नहीं मिल जाता।

ब्यूरो रिपोर्ट : RM24 न्यूज (सत्ता और सच के बीच का आईना)

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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