सर्कस की तरह रची जा रही पत्रकार को फंसाने की साजिश! भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर POCSO जैसे झूठे केस का डर…

अंबिकापुर। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की एक डरावनी साजिश अंबिकापुर से सामने आ रही है। क्षेत्र के सक्रिय पत्रकार और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अमित कुमार पाण्डेय ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस महानिरीक्षक (IG) सरगुजा रेंज को गुहार लगाई है। अमित का आरोप है कि भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ उनकी ‘मुखर आवाज’ को दबाने के लिए सत्ता और तंत्र से जुड़े कुछ लोग उन्हें खत्म करने या जेल भेजने की गंदी साजिश रच रहे हैं।
साजिश के तीन ‘खतरनाक’ चरण – पत्रकार अमित पाण्डेय द्वारा सौंपे गए आवेदन में तीन प्रमुख आशंकाएं जताई गई हैं जो किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय हैं:
- झूठा फंसाने की साजिश : अमित को डर है कि उन्हें पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर और संवेदनशील मामलों में फर्जी तरीके से फंसाया जा सकता है ताकि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूल धूसरित किया जा सके।
- सड़क दुर्घटना का खेल : सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि उन्हें ‘सड़क दुर्घटना’ का रूप देकर जान से मारने की योजना बनाई जा रही है।
- अपराधियों का इस्तेमाल : पालतू अपराधियों के माध्यम से उन पर शारीरिक हमला करवाने की भी आशंका जताई गई है।
क्यों निशाने पर हैं अमित? – संजय पार्क कॉलोनी, अंबिकापुर निवासी अमित कुमार पाण्डेय लगातार जनहित के मुद्दों को उठाते रहे हैं। प्रशासनिक खामियों, भ्रष्टाचार और घोटालों को उजागर करना ही शायद उनकी सबसे बड़ी गलती बन गई है। आवेदन के अनुसार, कुछ भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारी और सत्ताधारी नेता मिलकर उनके विरुद्ध यह चक्रव्यूह रच रहे हैं।
IG से सुरक्षा की मांग, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को भी सूचना – अमित ने न केवल सरगुजा IG को आवेदन दिया है, बल्कि इसकी प्रतियां मुख्यमंत्री कार्यालय (बगिया), पुलिस महानिदेशक (रायपुर), गृहमंत्री और विपक्ष के प्रमुख नेताओं (पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, चरणदास महंत) को भी भेजी हैं। उन्होंने मांग की है कि:
- उनके निवास और उनकी गतिविधियों के आसपास तत्काल सुरक्षा बल तैनात किया जाए।
- किसी भी फर्जी केस या साजिश की सूचना पर पुलिस तुरंत निष्पक्ष संज्ञान ले।
- पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
बड़ा सवाल: क्या सच बोलना अब गुनाह है? – अगर एक पत्रकार को सच लिखने और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने पर जेल भेजने या जान से मारने की धमकियां मिलती हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासन की विफलता है। अमित पाण्डेय का यह आवेदन केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा की मांग नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र पत्रकारिता के अस्तित्व की लड़ाई है।
अब देखना यह होगा कि सरगुजा पुलिस इस ‘गंभीर खतरे’ पर कितनी संजीदगी से कार्रवाई करती है या फिर एक और पत्रकार की आवाज को सिस्टम की फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा?



