विशेष रिपोर्ट: दुर्ग में ‘डिजिटल डकैती’ के मददगारों पर स्ट्राइक; म्युल अकाउंट्स के जरिए करोड़ों का खेल, 10 गिरफ्तार…

दुर्ग (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला इन दिनों साइबर अपराधियों के एक बड़े ‘ट्रांजिट हब’ के रूप में उभर रहा था, जिसका दुर्ग पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह को दबोचा है जो मनी म्युलिंग (Money Muling) के जरिए देशभर में हुई साइबर ठगी के पैसों को सफेद करने (Money Laundering) का काम कर रहा था।
गृह मंत्रालय की ‘डिजिटल आंख’ से खुला राज – इस पूरे ऑपरेशन की नींव भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने रखी।
- डाटा माइनिंग : समन्वय पोर्टल ने दुर्ग के कर्नाटक बैंक की एक शाखा में हो रहे संदिग्ध ट्रांजेक्शन को ट्रैक किया।
- पैटर्न : जांच में पाया गया कि इन खातों में देश के अलग-अलग राज्यों (जैसे तेलंगाना, महाराष्ट्र, दिल्ली) से ठगी गई छोटी-बड़ी रकमें जमा हो रही थीं और तुरंत निकाल ली जा रही थीं।
- दुर्ग पुलिस का एक्शन : सूचना मिलते ही दुर्ग पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड्स खंगाले और पाया कि 83 लाख 33 हजार 247 रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है।
‘म्युल अकाउंट’ का खतरनाक नेटवर्क : कैसे काम करता है यह सिस्टम? – पुलिस पूछताछ में जो खुलासा हुआ, वह चौंकाने वाला है। साइबर ठग सीधे अपने खातों में पैसा नहीं लेते, बल्कि वे ‘मनी म्युल’ (पैसा ढोने वाले) का इस्तेमाल करते हैं।
- लालच का जाल : गिरोह के सदस्य स्थानीय गरीब या बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते हैं। उन्हें झांसा दिया जाता है कि उनके खाते का उपयोग केवल ‘बिजनेस ट्रांजेक्शन’ के लिए होगा।
- सैलरी/किराया : इन खाताधारकों को अपना बैंक अकाउंट, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड गिरोह को सौंपने के बदले 10,000 से 20,000 रुपये प्रति माह का ‘किराया’ दिया जाता था।
- लेयरिंग (Layering) : ठगी का पैसा पहले इन म्युल अकाउंट्स में आता है, फिर वहां से दूसरे खातों में और अंततः क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन सट्टेबाजी (Betting apps) के जरिए विदेश भेज दिया जाता है।
पुलिस की छापेमारी और आरोपियों की गिरफ्तारी – दुर्ग पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घेराबंदी की, तो एक के बाद एक 10 आरोपियों के गिरेबान तक हाथ जा पहुंचे।
- सबूतों की बरामदगी : आरोपियों के पास से कई बैंकों के एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक और वो मोबाइल नंबर बरामद हुए हैं जो बैंक खातों से लिंक थे।
- बैंक खातों पर शिकंजा : पुलिस ने तुरंत बैंक प्रबंधन को पत्र लिखकर संबंधित खातों को ‘डेबिट फ्रीज’ (Hold) करवा दिया है, ताकि और पैसा बाहर न जा सके।
- जेल यात्रा : पकड़े गए सभी 10 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
पुलिस की चेतावनी : आपका खाता आपकी जिम्मेदारी – दुर्ग पुलिस प्रशासन ने इस मामले के बाद कड़ा संदेश जारी किया है :
”अगर आप अपना बैंक खाता किसी और को इस्तेमाल करने के लिए देते हैं, तो कानून की नजर में आप भी उतने ही बड़े अपराधी हैं जितना कि वह ठग। कमीशन के चक्कर में अपना भविष्य दांव पर न लगाएं।”
आगे क्या? – पुलिस अब इस गिरोह के ‘हैंडलर्स’ की तलाश कर रही है। ये वे लोग हैं जो इन 10 आरोपियों को निर्देश देते थे और किराए के खातों का डेटा मुख्य साइबर ठगों तक पहुंचाते थे। सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क के तार दुबई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से जुड़े हो सकते हैं।
दुर्ग पुलिस की यह मुस्तैदी साइबर सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो ठगों के ‘फाइनेंशियल ऑक्सीजन’ (पैसों की सप्लाई) को काटने में सफल रही है।



