उधारी के विवाद में टांगी से वार कर ली थी जान, ‘BNS’ के चक्रव्यूह में फंसा कातिल; कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद!…

रायगढ़। रायगढ़ पुलिस की चाक-चौबंद विवेचना और अभियोजन पक्ष की दमदार पैरवी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता। उधारी के मामूली विवाद में अपने ही साथी की नृशंस हत्या करने वाले आरोपी सूरज राठिया को माननीय चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश श्री विरेंद्र के न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मिली इस सजा ने मृतक के परिजनों को न्याय की सुकून भरी सांस दी है।

वारदात की खौफनाक रात – घटना 22 अगस्त की है, जब पूंजीपथरा स्थित विंध्याचल ऑक्सीजन प्लांट की लेबर कॉलोनी खून से सन गई थी। पिकअप चालक विरेन्द्र खम्हारी और उसका खलासी सूरज राठिया, जो कभी गहरे दोस्त थे, उधारी के पैसों को लेकर आपस में भिड़ गए। विवाद इतना बढ़ा कि सूरज ने आपा खो दिया और टांगी (कुल्हाड़ी) से विरेन्द्र पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। लहूलुहान विरेन्द्र ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
पुलिस की ‘सर्जिकल’ कार्रवाई – तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश मिश्रा और उनकी टीम ने बिना वक्त गंवाए घेराबंदी की। कातिल सूरज राठिया जब अपना सामान समेटकर भागने की फिराक में था, तभी पुलिस ने उसे दबोच लिया। आरोपी ने जुर्म तो कबूल कर लिया था, लेकिन उसे सजा दिलाना एक बड़ी चुनौती थी।
जयराम सिदार की ‘वॉटरटाइट’ विवेचना : इस केस को अंजाम तक पहुँचाने में सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार की भूमिका नायक की तरह रही। एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने केस की ऐसी ‘वॉटरटाइट’ फाइल तैयार की कि आरोपी के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा:
- वैज्ञानिक साक्ष्य : घटनास्थल से जुटाए गए पुख्ता सबूत।
- FSL रिपोर्ट : फॉरेंसिक जांच से हत्या के हथियार और आरोपी का सीधा संबंध स्थापित किया।
- अडिग गवाह : अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों को इतनी मजबूती से पेश किया गया कि वे अदालत में नहीं डगमगाए।
कोर्ट में प्रभावी पैरवी – अपर लोक अभियोजक सुश्री वंदना केशरवानी ने अदालत में दलीलों की ऐसी झड़ी लगाई कि अपराध की गंभीरता स्पष्ट हो गई। नतीजतन, कोर्ट ने आरोपी को उसके किए की कड़ी सजा सुनाते हुए उम्रकैद की मुहर लगा दी।
एसएसपी का ‘डिजिटल’ फॉर्मूला आया काम – रायगढ़ एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह की एक अनूठी पहल इस सफलता के पीछे की बड़ी वजह मानी जा रही है। उन्होंने विवेचकों के लिए एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जहाँ खुद एसएसपी और वरिष्ठ अधिकारी अनुसंधान (Investigation) की बारीकियों पर मार्गदर्शन देते हैं।
“पुलिस की विवेचना आरोपियों को उनके कृत्य के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाने पर केंद्रित होनी चाहिए। मजबूत विवेचना ही न्याय की सबसे बड़ी आधारशिला है।”
श्री शशि मोहन सिंह, एसएसपी रायगढ़
यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश है कि कानून की प्रक्रिया अब और भी वैज्ञानिक और सटीक हो गई है, जहाँ अपराधी का अंत सलाखों के पीछे ही होना निश्चित है।




