बेमेतरा : नियति की क्रूर मार, किसान मां के परिश्रम और बेटी के कन्यादान के संकल्प पर फिरी राख?…

बेमेतरा। खेती की मिट्टी में सिर्फ अनाज नहीं, एक किसान के अरमान और परिवार का भविष्य भी लहलहाता है। बेमेतरा जिले के गांगपुर गांव में गुरुवार को प्रकृति की मार और अचानक लगी आग ने एक संघर्षशील मां की महीनों की तपस्या को कुछ ही पलों में भस्म कर दिया। यह आग केवल फसल में नहीं, बल्कि उन सपनों में लगी है जो एक मां ने अपनी लाडली बेटी के विवाह और उज्ज्वल भविष्य के लिए संजोए थे।
परिश्रम की आहुति : जब फसल नहीं, उम्मीदें जलने लगीं – पीड़ित महिला किसान पुनिया बाई ध्रुव के लिए यह गेहूं की बालियां मात्र आय का साधन नहीं थीं। अगले माह अप्रैल में उनकी सुपुत्री का विवाह संपन्न होना है। एक मां ने पिछले चार महीनों तक हाड़-तोड़ मेहनत कर 6 एकड़ में फसल तैयार की थी, ताकि फसल की उपज से वह अपनी बेटी का ससम्मान कन्यादान कर सके और घर में खुशियों की शहनाई गूंज सके।
- अकस्मात आपदा : देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और करीब 3 एकड़ की लहलहाती फसल, जो पुनिया बाई के जीवन का आधार थी, पूरी तरह नष्ट हो गई।
- सामूहिक प्रयास : धुएं का गुबार देख ग्रामीणों और साथी किसानों ने साहस का परिचय देते हुए आग पर काबू पाने की भरसक कोशिश की, किंतु तब तक प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखा चुकी थी।
व्यवस्था की सुस्ती और पीड़ित परिवार की बेबसी : घटनास्थल पर दमकल की टीम के पहुंचने में हुई देरी ने आपदा को और गहरा कर दिया। वर्तमान में पुनिया बाई और उनका परिवार एक गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहा है। किसान के पुत्र कोमल ध्रुव ने भरे गले से बताया कि फसल ही उनके जीवनयापन और बहन की शादी का एकमात्र संबल थी, जो अब राख के ढेर में तब्दील हो चुकी है।
प्रशासनिक संवेदनशीलता की प्रतीक्षा : दुखद है कि इस बड़ी क्षति के बाद भी अब तक शासन या प्रशासन का कोई प्रतिनिधि पीड़ित परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा है। किसान परिवार अब शासन की ओर एक आशा भरी दृष्टि से देख रहा है कि शायद इस कठिन घड़ी में उन्हें उचित मुआवजा और सहायता प्राप्त हो सके, ताकि बेटी की विदाई का संकल्प अधूरा न रहे।
हमारा विनम्र आग्रह : एक किसान की मेहनत और एक बेटी की खुशियों का सम्मान सर्वोपरि है। हम जिला प्रशासन और राज्य सरकार से विनम्र अपील करते हैं कि वे इस मामले का संज्ञान लें और पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक संबल प्रदान करें, ताकि मानवता और न्याय की जीत हो सके।

