अंबिकापुर

खातेदारों की गाढ़ी कमाई डकार गया बैंक कर्मी : 7.50 लाख का ‘महाघोटाला’, इंडसइंड बैंक में जालसाजी का पर्दाफाश!…

सरगुजा : जिले के हृदय स्थल अम्बिकापुर में बैंकिंग जगत को हिला देने वाला एक बड़ा ‘इनसाइडर जॉब’ (अंदरूनी धोखाधड़ी) सामने आया है। एमजी रोड स्थित इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) के एक विश्वासपात्र कर्मचारी ने संस्थान और ग्राहकों की पीठ में छुरा घोंपते हुए 7.50 लाख रुपये से अधिक की राशि का गबन कर लिया। आरोपी ने न केवल नकद राशि डकारी, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों के साथ ऐसी ‘जादूगरी’ की कि बैंक का सिस्टम भी महीनों तक चकमा खाता रहा।

​गांधीनगर पुलिस ने बैंक मैनेजर की शिकायत पर आरोपी सागीर अहमद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की गंभीर धाराओं के तहत जुर्म दर्ज कर लिया है।

शातिर ‘मोडस ऑपरेंडी’ : रक्षक ही बना भक्षक – आरोपी सागीर अहमद (पिता स्व. बशीर अंसारी), जो कि बैंक में क्रेडिट सत्यापन अधिकारी (CVO) जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात था, ने अपनी पॉवर का इस्तेमाल लूट के लिए किया। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं:

  • निजी खाते की ‘पैरेलल बैंकिंग’: आरोपी ग्राहकों को झांसा देता था कि सर्वर डाउन है या तकनीकी खराबी है, और किस्तों की राशि सीधे अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लेता था।
  • कूटरचित दस्तावेजों का जाल: गबन को छिपाने के लिए सागीर ने बैंक की फर्जी जमा पर्चियां (Deposit Slips) और नकली अकाउंट स्टेटमेंट तैयार किए। जब ग्राहक अपना बैलेंस पूछते, तो वह उन्हें ‘एडिटेड’ स्टेटमेंट थमा देता था, जिसमें लोन चुकता दिखता था।
  • वसूली एजेंटों से उगाही: हद तो तब हो गई जब उसने फील्ड से पैसा लाने वाले रिकवरी एजेंटों को भी नहीं बख्शा। उनसे वसूली गई वैध राशि को बैंक के मुख्य खाते में डालने के बजाय अपनी जेब में रख लिया।

सेल्फी और स्क्रीनशॉट ने खोला ‘पाप का घड़ा’ : आरोपी सागीर अहमद को लगा था कि वह कागजों में हेरफेर कर बच निकलेगा, लेकिन आधुनिक तकनीक ने उसे दबोच लिया। जब बैंक ने डिफ़ॉल्टर ग्राहकों को नोटिस भेजा, तो आक्रोशित ग्राहक बैंक पहुंचे। उन्होंने बैंक मैनेजर अरुण कुमार शराफ के सामने ऐसे सबूत रखे कि बैंक प्रशासन सन्न रह गया:

  • ​ग्राहकों के पास आरोपी को नकद पैसे थमाते समय की ‘सेल्फी’ मौजूद थी।
  • ​डिजिटल पेमेंट के सक्सेसफुल ट्रांजैक्शन स्क्रीनशॉट थे, जो आरोपी के निजी खाते के थे।
  • ​फर्जी रसीदें थीं, जिन पर बैंक की सील-मुहर का दुरुपयोग किया गया था।

पुलिसिया हंटर : BNS की नई धाराओं में फंसेगा ‘जालसाज’ – गांधीनगर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 316(5) (लोक सेवक या बैंक कर्मचारी द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और 318(4) (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में दोषी पाए जाने पर आरोपी को लंबे समय तक सलाखों के पीछे गुजारना पड़ सकता है।

मैनेजर का कड़ा रुख – ​बैंक शाखा प्रबंधक ने पुलिस को बताया कि आरोपी को गबन की गई राशि लौटाने के लिए ‘कारण बताओ नोटिस’ और पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन उसने चोरी की राशि जमा करने के बजाय टाल-मटोल जारी रखी। इसके बाद बैंक ने आरोपी को निलंबित कर कानूनी कार्रवाई शुरू की।

जनहित में जारी संदेश : यह घटना एक चेतावनी है। बैंक का काम हमेशा बैंक के अधिकृत काउंटर पर ही करें। किसी भी कर्मचारी के ‘पर्सनल अकाउंट’ में पैसा डालना जोखिम भरा है। हमेशा कंप्यूटर से निकली रसीद ही लें और बैंक के आधिकारिक ऐप पर अपना बैलेंस चेक करते रहें।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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