रायगढ़ के ‘डेथ ज़ोन’ बने कारखानों पर प्रशासन का हथौड़ा; चार कंपनियों पर लगा 14 लाख से अधिक का अर्थदंड…

रायगढ़। औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले पूंजीपतियों के खिलाफ रायगढ़ प्रशासन ने जंग छेड़ दी है। जिले के विभिन्न कारखानों में हुई दुर्घटनाओं और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए, उप संचालक (औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा) श्री राहुल पटेल ने सघन निरीक्षण अभियान चलाया था। इस जांच में सुरक्षा के दावों की पोल खुल गई, जिसके बाद श्रम न्यायालय ने फरवरी 2026 में दोषियों को कड़ी सजा सुनाई।
- मेसर्स अग्रोहा स्टील एण्ड पावर : सबसे बड़ी लापरवाही, ₹8 लाख का जुर्माना – ग्राम पाली स्थित इस इकाई में सुरक्षा के नाम पर भारी खिलवाड़ पाया गया। यहाँ न केवल काम करने की जगह असुरक्षित थी, बल्कि नियमों (धारा 7A, 32, 41) को पूरी तरह दरकिनार किया गया था।
- दोषी : अधिभोगी श्री उत्तम कुमार अग्रवाल और प्रबंधक श्री वीर विक्रम सिंह।सजा : न्यायालय ने दोनों पर 4-4 लाख रुपये (कुल 8 लाख) का व्यक्तिगत अर्थदंड लगाया है।
- सजा : न्यायालय ने दोनों पर 4-4 लाख रुपये (कुल 8 लाख) का व्यक्तिगत अर्थदंड लगाया है।
- मेसर्स विष्णु ब्रिक्स इंडस्ट्रीज : सुरक्षा मानकों में भारी सेंध – जशपुर जिले के फरसाबहार स्थित इस ईंट उद्योग में निरीक्षण के दौरान पाया गया कि यहाँ कारखाना अधिनियम की बुनियादी धाराओं (6, 7 और 41) का भी पालन नहीं हो रहा था।
- दोषी: अधिभोगी एवं प्रबंधक श्री विष्णु प्रसाद।
- सजा: श्रम न्यायालय ने उन पर 3 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
- मेसर्स नवदुर्गा फ्यूल प्रा.लि. : नियमों की अनदेखी पड़ी महंगी – सराईपाली स्थित इस प्लांट में सुरक्षा उपकरणों और प्रबंधन की बड़ी चूक सामने आई। यहाँ धारा 7A(2)(A) और नियम 73(1) के तहत उल्लंघन दर्ज किए गए।
- दोषी: अधिभोगी एवं प्रबंधक श्री प्रकाश बेहरा।
- सजा: न्यायालय ने उन्हें 2 लाख 30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
- मेसर्स इंड सिनर्जी लिमिटेड : कर्मकार नियमों का उल्लंघन – कोटमार स्थित इस कंपनी और ए.जी. कंस्ट्रक्शन के बीच समन्वय में कमी और निर्माण श्रमिकों की सेवा शर्तों (नियम 42, 54, 178) की अनदेखी पाई गई।
- दोषी: संचालक श्री नेत्रानंद थतोई और श्री अदालत गिरी
- सजा: दोनों पर 8-8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
प्रशासन की सख्त चेतावनी: “श्रमिकों की जान की कीमत मुनाफा नहीं हो सकता” – उप संचालक राहुल पटेल ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक शुरुआत है। जिले के हर छोटे-बड़े कारखाने का डेटाबेस तैयार है और बिना सूचना के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
मुख्य कानूनी धाराएं जिनका हुआ उल्लंघन :
- धारा 7A: श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की सामान्य जिम्मेदारी।
- धारा 41: खतरनाक प्रक्रियाओं के खिलाफ सुरक्षा उपाय।
- धारा 32: फर्श, सीढ़ियों और आने-जाने के रास्तों की मजबूती।
औद्योगिक जगत में हड़कंप : इस कार्रवाई ने औद्योगिक घरानों को यह साफ संदेश दे दिया है कि रायगढ़ में अब ‘जुगाड़’ या ‘लापरवाही’ से काम नहीं चलेगा। अगर कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो संचालकों को जेल की हवा और भारी आर्थिक नुकसान झेलने के लिए तैयार रहना होगा।




