कोयले की राजधानी में हाथियों का खूनी तांडव : कोरबा के कोरकोमा में मंडी प्रभारी को हाथी ने बेरहमी से कुचला, मौके पर ही मौत…

कोरबा। छत्तीसगढ़ के ऊर्जा धानी कोरबा में जंगली हाथियों का आतंक अब रिहायशी और कार्यस्थलों तक पहुँच गया है। बीती रात कोरकोमा क्षेत्र में एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसने पूरे प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। कुदमुरा समिति के कोरकोमा धान उपार्जन केंद्र में तैनात मंडी प्रभारी राजेश कुमार सिंह राजपूत को एक दंतैल हाथी ने अपनी सूंड से पटककर और पैरों तले कुचलकर मौत के घाट उतार दिया।
आधी रात का मंजर : रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना – जानकारी के मुताबिक, घटना बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात लगभग 2:00 बजे की है। मंडी प्रभारी राजेश कुमार सिंह अपनी पत्नी के साथ उपार्जन केंद्र (फड़) में ही मौजूद थे। जब पूरा इलाका गहरी नींद में था, तब जंगल की ओर से आए एक विशालकाय हाथी ने अचानक हमला बोल दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हाथी ने राजेश को संभलने का मौका तक नहीं दिया। उनकी पत्नी ने शोर मचाकर और भागकर बमुश्किल अपनी जान बचाई, लेकिन राजेश हाथी के चंगुल में फंस गए। हाथी के हमले से उनके शरीर के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना मंडी में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है, जो इस त्रासदी की भयावहता को चीख-चीख कर बयां कर रही है।
सिस्टम की ‘लापरवाही’ पर भड़का आक्रोश – इस दर्दनाक मौत के बाद क्षेत्र के कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी उबाल है। मंडी प्रभारियों और सहकारिता विभाग के कर्मचारियों ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
- सुरक्षा का अभाव : कर्मचारियों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना होने के बावजूद सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे।
- मुआवजे की मांग : आक्रोशित सहकर्मियों ने मृतक के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई है।
- जिम्मेदारों पर कार्रवाई : मांग की जा रही है कि उन अधिकारियों पर कार्रवाई हो जिन्होंने हाथियों की आमद के बावजूद कर्मचारियों को बिना सुरक्षा के मोर्चे पर छोड़ दिया।
दहशत के साये में कोरकोमा – घटना के बाद से पूरे कुदमुरा वन परिक्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं। वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर तैनात है, लेकिन हाथियों का दल अभी भी आसपास के जंगलों में सक्रिय बताया जा रहा है। प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है।
बड़ा सवाल : क्या विभाग अब भी केवल ‘मुआवजे’ का मरहम लगाकर चुप बैठ जाएगा, या हाथियों और इंसानों के इस बढ़ते खूनी संघर्ष को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा? एक कर्मचारी की जान की कीमत क्या केवल कुछ लाख रुपये की फाइल है?




