खाकी का दर्द, ‘डिप्टी’ की दरिंदगी : 7 साल तक जिस्म से खेला, 3 बार कोख उजाड़ी; अब ‘साहब’ हुए सस्पेंड…

बालोद। छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सेवा (राज्य प्रशासनिक सेवा) का एक चमकता चेहरा अब ‘कलंक’ की कालिख से पुत चुका है। बीजापुर में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके को शासन ने सस्पेंड कर दिया है। आरोप इतने संगीन हैं कि रूह कांप जाए—एक महिला आरक्षक को शादी का झांसा देकर 7 साल तक बिस्तर तक खींचना, तीन बार उसका गर्भपात करवाना और लाखों की ठगी करना।
यह कहानी एक ‘अफसर’ की हवस और एक ‘वर्दी’ की बेबसी की है, जिसका खुलासा 6 महीने की लंबी जद्दोजहद और RTI के प्रहार के बाद हुआ है।
मोहब्बत से ‘मशीन’ समझने तक का सफर : यह सिलसिला साल 2017 में शुरू हुआ। तब दिलीप उइके ‘साहब’ नहीं थे, बल्कि एक आम छात्र थे। डौंडी ITI में उनकी मुलाकात एक युवती से हुई। दोनों हमसफर बनने के सपने देखने लगे। 2017 में युवती की पुलिस (CAF) में नौकरी लग गई, लेकिन दिलीप बेरोजगार थे।
- त्याग की पराकाष्ठा : प्रेमिका अपनी सैलरी से हर महीने 5 हजार रुपये दिलीप को भेजती रही ताकि वह PSC की तैयारी कर सके।
- धोखे की शुरुआत : जैसे ही 2020 में दिलीप ‘डिप्टी कलेक्टर’ बने, उनके तेवर बदल गए। जिस महिला ने उन्हें अफसर बनाया, उसी के साथ ‘यूज एंड थ्रो’ का खेल शुरू हो गया।
तीन बार ‘कत्ल’ हुई कोख : शिकायत के मुताबिक, डिप्टी कलेक्टर ने इस दौरान महिला आरक्षक का तीन बार गर्भपात कराया।
- मार्च 2017 : पहली बार गर्भवती होने पर ‘करियर’ का वास्ता देकर दवा खिलाई।
- जनवरी 2025 : बीजापुर के सरकारी क्वार्टर में बुलाकर जबरन अबॉर्शन कराया।
- मई 2025 : तीसरी बार फिर वही अमानवीय कृत्य दोहराया गया।
अंडमान की सैर और आर्थिक डकैती : दिसंबर 2024 में दिलीप पीड़िता को अंडमान घुमाने ले गए, जहाँ हवस का नंगा नाच चला। इतना ही नहीं, ‘साहब’ की अय्याशी का खर्च भी पीड़िता उठाती रही।
- कार की ठगी : महिला के नाम पर ब्रेजा कार (CG 24 T 3967) खरीदी और बाद में चालाकी से अपने नाम ट्रांसफर करा ली।
- कर्ज का बोझ : शादी का झांसा देकर पीड़िता से बैंक से लोन तक करवा लिया और 3.30 लाख रुपये अपने खाते में डलवा लिए।
RTI ने खोली सिस्टम की पोल : जून 2025 में जब दिलीप शादी से मुकर गया, तब पीड़िता ने डौंडी थाने में FIR कराई। लेकिन रसूख के आगे कार्रवाई सुस्त पड़ गई। पीड़िता ने हार नहीं मानी और RTI (सूचना का अधिकार) का सहारा लिया। तब जाकर छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) का वह आदेश सामने आया, जिसमें दिलीप उइके को 03/02/2026 को निलंबित करने की पुष्टि की गई।
प्रशासनिक हंटर : आदेश की मुख्य बातें –
”दिलीप कुमार उइके (रा.प्र.से.), डिप्टी कलेक्टर, बीजापुर को उनके विरुद्ध गंभीर शिकायतों के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कमिश्नर कार्यालय, बस्तर संभाग (जगदलपुर) रहेगा।”
सवालिया निशान : क्या सिर्फ सस्पेंशन काफी है? एक रसूखदार अधिकारी ने जिस तरह कानून की रक्षक (महिला आरक्षक) का ही चीरहरण किया, क्या उसे सलाखों के पीछे नहीं होना चाहिए?
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