मुआवजे के लिए ‘जहरीली’ साजिश : पति की आत्महत्या को बताया सर्पदंश, फर्जी हस्ताक्षर कर डकारा सरकारी पैसा!…

बिलासपुर। सरकारी खजाने में सेंध लगाने के लिए लोग किस हद तक गिर सकते हैं, इसका एक खौफनाक उदाहरण तखतपुर में सामने आया है। एक महिला ने अपने पति की मौत का सौदा करते हुए न केवल सिस्टम को ठगा, बल्कि तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर कर मुआवजे की राशि भी डकार ली। अब जांच की आंच में घिरी आरोपी पत्नी उर्वशी श्रीवास के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
साजिश की परतें : मुर्दा भी बदल दिया, हस्ताक्षर भी चुराए – कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर हुई उच्च स्तरीय जांच ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं:
- रिकॉर्ड का खेल : महिला ने मुआवजा पाने के लिए जिस ‘मर्ग’ (क्रमांक 23/2022) का सहारा लिया, वह उसके पति का था ही नहीं। सरकारी दस्तावेजों में वह मर्ग शोभाराम कौशिक नाम के व्यक्ति का था, जिसने फांसी लगाकर जान दी थी।
- अधिकारी के नकली साइन: तत्कालीन तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला ने खुद पुष्टि की है कि सहायता राशि जारी करने वाले आदेश पत्र पर उनके हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी हैं। यानी महिला ने न केवल झूठ बोला, बल्कि सरकारी मुहर और दस्तखत की भी जालसाजी की।
स्वजन के बयानों ने खोली पोल : झूठ की बुनियाद तब पूरी तरह ढह गई जब आरोपी महिला के पिता और भाई (मृतक के ससुर और साले) ने सच उगल दिया। उन्होंने बताया कि:
- मृतक पुरुषोत्तम की मौत घर पर ही हुई थी।
- सांप ने उसे मौत से 2-3 महीने पहले काटा था, जिसके बाद उसे लकवा मार गया था।
- मौत के वक्त सर्पदंश की कोई घटना नहीं हुई और न ही शव का पोस्टमार्टम कराया गया था।
“यह केवल जालसाजी नहीं, बल्कि व्यवस्था की आंखों में धूल झोंकने का दुस्साहस है। सरकारी खजाने को चूना लगाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा
पुलिसिया कार्रवाई की तलवार : तहसीलदार, थाना प्रभारी और चिकित्सा अधिकारी की तीन सदस्यीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अब उर्वशी श्रीवास के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत जुर्म दर्ज कर लिया है।




