166 महतारी सदन की स्वीकृति : 49.80 करोड़ का बजट, मगर सवालों के घेरे में पूरी योजना…

रायपुर, 22 अगस्त 2025। प्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की महत्वाकांक्षी योजना ‘महतारी सदन’ अब तेज रफ्तार पकड़ चुकी है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों से एक झटके में 166 महतारी सदन की स्वीकृति मिल गई, जिस पर 49 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
लेकिन, बड़े दावों के बीच कई ज्वलंत सवाल भी खड़े हो रहे हैं –
- क्या पहले से बने 50 से अधिक महतारी सदन वास्तव में महिलाओं को आत्मनिर्भर बना पाए हैं, या वे सिर्फ सरकारी भवन बनकर रह गए हैं?
- 30 लाख प्रति इकाई की लागत में क्या टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण संभव है, या यह भी ठेकेदार-नौकरशाही के गठजोड़ का नया ठिकाना बन जाएगा?
- महिलाओं के लिए बने ये भवन सिर्फ बैठने का स्थान साबित होंगे या रोजगार व प्रशिक्षण का असली केंद्र बन पाएंगे?
महिलाओं की मांग से शुरू हुआ, लेकिन…
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने माना कि ग्रामीण भ्रमण के दौरान महिलाओं ने बैठने और सामुदायिक गतिविधियों की जगह न होने की शिकायतें की थीं। लेकिन अब जब यह योजना हजारों करोड़ के बजट की ओर बढ़ रही है, तो इसका उपयोग और पारदर्शिता सबसे बड़ा मुद्दा है।
5 साल में हर पंचायत का वादा, मगर हकीकत?... सरकार ने ऐलान किया है कि 5 वर्षों में सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन होंगे। मगर ज़मीनी हकीकत यह है कि पहले से स्वीकृत 368 महतारी सदनों में से ज्यादातर की रिपोर्ट या उपयोगिता सामने नहीं आ रही है। सवाल है कि जो बने हैं, वे आज गांव की महिलाओं के जीवन में कितना बदलाव ला पाए हैं?
कागज़ी डिज़ाइन के मुताबिक हर महतारी सदन में –
- हॉल, किचन, स्टोर रूम
- पेयजल व ट्यूबवेल
- सामुदायिक शौचालय
- महिलाओं की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवाल
होने का दावा है। लेकिन अगर निर्माण की निगरानी और गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह भी कई योजनाओं की तरह “पोस्टर प्रोजेक्ट” बनकर रह जाएगा।
सवाल जो आम हैं:
- क्या 30 लाख की लागत वास्तव में महिलाओं के लिए रोजगार-प्रशिक्षण केंद्र खड़ा कर सकती है, या यह महज कंक्रीट का ढांचा होगा?
- क्या सरकार उन गांवों का ऑडिट कराएगी, जहां पहले से महतारी सदन बने हैं?
- क्या महिलाओं को इस योजना की निगरानी में शामिल किया जाएगा, या यह पुरुष प्रधान नौकरशाही के हाथों का खिलौना बन जाएगा?
योजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन जब तक इसका ईमानदार मूल्यांकन, पारदर्शिता और महिलाओं की सीधी भागीदारी नहीं होगी, तब तक “महतारी सदन” का सपना अधूरा ही रहेगा।