बिलासपुर में गरजी शिवसेना: डॉ. अभिषेक वर्मा के दौरे से सियासी सरगर्मी तेज, 35 परिवारों की ‘घर वापसी’ से मचा हड़कंप!…

- निकाय चुनावों के लिए फूंका चुनावी बिगुल; बूथ स्तर पर मजबूत किलेबंदी, गौ-संरक्षण और शहर के विकास पर दिखाए आक्रामक तेवर…
बिलासपुर। शिवसेना के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा के दो दिवसीय बिलासपुर प्रवास ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। संगठन विस्तार की रणनीति, 35 परिवारों की सनातन धर्म में वापसी और आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर कार्यकर्ताओं में भरे गए नए जोश के साथ यह दौरा बेहद प्रभावी और आक्रामक रहा। डॉ. वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया कि बिलासपुर के विकास और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए शिवसेना पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी।
35 परिवारों की घर वापसी : धर्मांतरण और गौहत्या पर दो टूक – दौरे का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु 23 सितंबर को आयोजित सनातन धर्म वापसी कार्यक्रम रहा। यहां 35 परिवारों ने औपचारिक रूप से सनातन धर्म में पुनः वापसी की। इस दौरान डॉ. अभिषेक वर्मा ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा:
- सनातन केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि भारत की मूल जीवन-पद्धति, संस्कार और गौरवशाली संस्कृति है।
- जबरन या प्रलोभन देकर कराए जा रहे धर्मांतरण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- गौ-संरक्षण और गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर सामाजिक और वैधानिक स्तर पर निर्णायक संघर्ष जारी रहेगा।
निकाय चुनावों पर नजर : बूथ और मंडल स्तर पर मोर्चाबंदी – शिवसेना की संगठनात्मक बैठक में आगामी नगर निकाय और अन्य स्थानीय चुनावों का खाका खींचा गया। प्रदेश प्रमुख धनंजय परिहार के नेतृत्व में संगठन को बूथ और मंडल स्तर तक धारदार बनाने का संकल्प लिया गया। डॉ. वर्मा ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित के मुद्दों, नागरिक समस्याओं और स्थानीय भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाएं ताकि संगठन सीधे जनता की पहली पसंद बन सके।
भावुक पल : डिप्टी सीएम अरुण साव की मौजूदगी में पिता को नमन – डॉ. वर्मा ने अपने पिता, प्रख्यात साहित्यकार एवं पूर्व सांसद स्व. श्रीकांत वर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस दौरान प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में खासा ध्यान खींचा। दोनों नेताओं ने बिलासपुर के विकास और स्व. श्रीकांत वर्मा के ऐतिहासिक योगदान पर चर्चा की।
श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह में साहित्य, शिक्षा, समाजसेवा और संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को प्रतिष्ठित ‘श्रीकांत वर्मा सम्मान’ से नवाजा गया।
“बिलासपुर मेरी कर्मभूमि, विकास से कोई समझौता नहीं” – प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. वर्मा ने बिलासपुर से अपने अटूट भावनात्मक रिश्ते को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके परिवार की जड़ें इस शहर में हैं और माता-पिता की स्मृतियां यहां की मिट्टी से जुड़ी हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि बिलासपुर के विकास, औद्योगिक विस्तार और बुनियादी ढांचे की बेहतरी के लिए वे हर स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे। प्रवास के समापन पर उन्होंने बिलासपुर की जनता, सामाजिक संस्थाओं, मीडिया और शिवसेना कार्यकर्ताओं के अभूतपूर्व स्वागत के प्रति आभार व्यक्त किया।




