अंबिकापुर

लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश : अंबिकापुर में पत्रकार पर खूनी हमला, क्या खाकी के इकबाल को चुनौती दे रहा आदतन गुंडा मजहर खान?…

अंबिकापुर। शहर में अब कलम सुरक्षित नहीं है। कानून को ठेंगे पर रखने वाले आदतन अपराधी मजहर खान और उसके गुर्गों ने पत्रकार पर जानलेवा हमला कर यह साबित कर दिया है कि उन्हें न तो पुलिस का खौफ है और न ही संविधान का डर। यह हमला सिर्फ एक पत्रकार पर नहीं, बल्कि अंबिकापुर की जनता की उस आवाज पर है जो सच बोलने का साहस करती है।

वारदात : पेशेवर ईमानदारी की सजा ‘खून’ से देने की कोशिश – मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित पत्रकार जब अपने कर्तव्य पथ पर थे, तभी मजहर खान ने अपने साथियों के साथ मिलकर उन्हें घेर लिया। हमलावरों ने पूर्व नियोजित तरीके से लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से प्रहार किया। चीख-पुकार सुनकर जब तक लोग मदद के लिए पहुंचे, हमलावर पत्रकार को मरणासन्न स्थिति में छोड़कर फरार हो गए। वर्तमान में पत्रकार अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।

बड़ा सवाल : ‘सफेदपोशों’ की सरपरस्ती में पल रहे हैं ये अपराधी? – क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि मजहर खान जैसे अपराधियों का दुस्साहस यूँ ही नहीं बढ़ा है। गलियारों में सुगबुगाहट है कि:

  • ​इन अपराधियों को किन प्रभावशाली राजनेताओं का अभयदान प्राप्त है?
  • ​आखिर वे कौन लोग हैं जो पुलिस की कार्रवाई के बीच ‘ढाल’ बनकर खड़े हो जाते हैं?
  • ​क्या सिस्टम इन गुंडों को पाल रहा है, ताकि वे सच बोलने वाली आवाजों को खामोश कर सकें?

​”जब कलम लहूलुहान होती है, तो पूरा समाज अंधकार की ओर जाता है। अब वक्त आ गया है कि उन चेहरों को बेनकाब किया जाए जो इन अपराधियों के पीछे खड़े हैं।”

पुलिस की कार्रवाई: कागजों पर मुस्तैदी या धरातल पर न्याय? – हालांकि पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है और विभिन्न धाराओं के तहत मामला कायम किया है, लेकिन सवाल अभी भी वही है – गिरफ्तारी कब? क्या प्रशासन केवल खानापूर्ति करेगा या इन अपराधियों के मन में ऐसा खौफ पैदा करेगा कि भविष्य में कोई किसी पत्रकार की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत न करे?

उबल रहा है पत्रकार जगत – इस कायराना हमले के बाद प्रदेश भर के पत्रकार संगठनों में भारी उबाल है। संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है :

  • तत्काल गिरफ्तारी: आरोपियों को 24 घंटे के भीतर सलाखों के पीछे भेजा जाए।
  • सुरक्षा गारंटी: क्षेत्र के पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण प्रदान किया जाए।
  • संरक्षणदाताओं पर प्रहार: हमलावरों के साथ-साथ उनके राजनैतिक आकाओं पर भी शिकंजा कसा जाए।

संपादकीय टिप्पणी : यदि आज मजहर खान और उसके गुर्गों पर कठोरतम कार्रवाई नहीं हुई, तो कल कोई भी अपराधी किसी भी नागरिक की आवाज दबाने के लिए सड़कों पर तांडव करेगा। अंबिकापुर प्रशासन के पास यह मौका है कि वह अपनी साख बचाए और यह साबित करे कि जिले में ‘गुंडाराज’ नहीं, बल्कि ‘कानून का राज’ है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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