भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा ‘मुक्तिधाम’: भैयाथान के सलका में 4.89 लाख का निर्माण बना मजाक, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा…

सूरजपुर। विकास के दावों और धरातल की हकीकत के बीच की खाई ग्राम पंचायत सलका में साफ देखी जा सकती है। जनपद पंचायत भैयाथान के अंतर्गत ग्राम पंचायत सलका में करीब 4.89 लाख रुपये की लागत से बन रहा मुक्तिधाम निर्माण कार्य विवादों के घेरे में आ गया है। वर्षों तक अधर में लटके रहने के बाद जब काम दोबारा शुरू हुआ, तो उसमें गुणवत्ता की ऐसी ‘धज्जियां’ उड़ीं कि ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया।
बांस के सहारे ‘मजबूती’ का दिखावा? – निर्माण स्थल पर मानकों को ताक पर रखकर काम किए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि:
- कमजोर नींव और पिलर : खंभों की ढलाई में भारी तकनीकी खामियां हैं, जो पहली नजर में ही कमजोर नजर आती हैं।
- असंतुलित ढांचा : निर्माण के लिए बांस के डंडों का सहारा लिया जा रहा है, जिससे ढांचे के संतुलन और भविष्य की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
- घटिया फिनिशिंग : कंक्रीट के काम में फिनिशिंग का अभाव यह साफ कर रहा है कि सरकारी राशि को केवल ठिकाने लगाने की कोशिश की जा रही है।
इंजीनियर नदारद, अंधेरगर्दी चरम पर – ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि निर्माण स्थल से इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह गायब हैं। बिना किसी तकनीकी पर्यवेक्षण के हो रहे इस कार्य से पारदर्शिता खत्म हो गई है। लोगों का कहना है कि यह जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी बजट का खुला दुरुपयोग है।
”साहब! यह कैसा निर्माण है जो बनने से पहले ही ढहने जैसा लग रहा है? न कोई देखने वाला है, न कोई टोकने वाला।”
स्थानीय ग्रामीण
सरपंच की सफाई : “प्लास्टर से सुधार देंगे कमी” – इस पूरे विवाद पर वर्तमान सरपंच शिवकुमार अगरिया का तर्क भी चौंकाने वाला है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह कार्य पूर्व कार्यकाल से अधूरा पड़ा था, जिसे अब शेष राशि और निजी खर्च से पूरा किया जा रहा है। एक कॉलम (खंभे) में कमी की बात स्वीकारते हुए उन्होंने बड़ी ही सहजता से कह दिया कि इसे “प्लास्टर से सुधार दिया जाएगा।” अब सवाल यह उठता है कि क्या प्लास्टर करने से पिलर की बुनियादी मजबूती वापस आ जाएगी? या फिर यह सिर्फ भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश है?
जनता की मांग : निष्पक्ष जांच और कार्रवाई – सलका के ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनकी मांग है कि :
- उच्चाधिकारियों की निगरानी में निर्माण की तकनीकी जांच हो।
- दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई की जाए।
- मुक्तिधाम जैसे संवेदनशील स्थान का निर्माण पूरी गुणवत्ता के साथ पुनः कराया जाए।
शासन-प्रशासन के लिए यह बड़ी चुनौती है कि वे इस ‘अधूरी और कमजोर’ संरचना को संरक्षण देते हैं या ग्रामीणों को इंसाफ दिलाते हुए भ्रष्टाचार पर नकेल कसते हैं।




