लैलूंगा के केराबहार में कागजी विकास की खुली पोल: 80% हितग्राही बदहाल, फाइलों में बंट गए करोड़ों!…

रायगढ़। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत ग्राम केराबहार में गरीबों को पक्का मकान देने का सरकारी दावा एक बड़ा मजाक बन गया है। आधिकारिक रिपोर्ट और स्थानीय शिकायतों के बीच का अंतर यह बताने के लिए काफी है कि योजनाओं का पैसा बीच रास्ते में ही दम तोड़ रहा है। जहाँ प्रशासन ‘डिजिटल इंडिया’ का ढोल पीट रहा है, वहीं केराबहार के 80% हितग्राही आज भी अपनी किश्तों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
फाइलों में ‘महल’, हकीकत में ‘मल्बा’ – सरकारी रिपोर्ट के पन्नों पर केराबहार के 74 परिवारों के भाग्य चमकते दिख रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है:
- अधूरे सपने : रिपोर्ट में दर्ज 74 में से 40 से अधिक आवास (जैसे अलेख, अंबिका, और बाबूलाल) अभी भी ‘Below Foundation Level’ (नींव से नीचे) पर ही अटके हुए हैं।
- दावा बनाम हकीकत : प्रशासन का दावा है कि अलेख और बाबूलाल जैसे कई हितग्राहियों को 95,000 रुपये जारी हो चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अभी भी जमीन फाड़कर ऊपर नहीं आ पाया है।
- भटकते ग्रामीण : 80% हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें स्वीकृत राशि का लाभ समय पर नहीं मिला, जिससे निर्माण कार्य अधर में लटका है।
निरीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति? – रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ‘मोबाईल ऐप’ के जरिए लगातार भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
- कागजी निरीक्षण : रिकॉर्ड के अनुसार, 04 फरवरी 2026 को निरीक्षण किया गया था।
- कड़वा सवाल : यदि निरीक्षण हुआ, तो अधिकारियों को यह क्यों नहीं दिखा कि अधिकांश मकान अभी भी ‘नींव’ के स्तर पर ही क्यों पड़े हैं?
- अंतिम ट्रांजेक्शन : सरकारी डेटा में 30 जनवरी 2026 को बड़ी राशि जारी होना दिखाया गया है, पर ग्रामीण आज भी खाली हाथ खड़े हैं।
पूरे गांव में मात्र 3 घरों की छत नसीब – केराबहार की इस रिपोर्ट का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि 74 स्वीकृत आवासों में से केवल 3 हितग्राही (देवचरण, रोहिणी और सुकुमारी) ही ‘Roof Cast’ (छत) के स्तर तक पहुँच पाए हैं। बाकी 71 परिवारों के लिए पक्का मकान आज भी एक दूर का सपना बना हुआ है।
प्रशासनिक सुस्ती या बड़ी लापरवाही? – 16 मई 2025 को एक साथ दर्जनों आवासों की मंजूरी दी गई थी, लेकिन 9 महीने बीत जाने के बाद भी काम ‘नींव’ से आगे नहीं बढ़ पाया। क्या प्रशासन केवल आंकड़े बाजी में व्यस्त है? केराबहार के ग्रामीण आज सवाल पूछ रहे हैं कि जब पैसा ‘रिलीज’ हो गया है, तो उनके मकानों की दीवारें खड़ी क्यों नहीं हो रही हैं?
केराबहार की स्थिति – आंकड़ों का खेल (रिपोर्ट के अनुसार):
- कुल स्वीकृत आवास: 74
- नींव स्तर पर अटके: 40 से अधिक
- छत तक पहुँचे: मात्र 3
- ताजा रिपोर्ट तिथि: 28/02/2026
यह खबर प्रशासन की नींद उड़ाने के लिए काफी है – जब तक पैसा गरीब की झोपड़ी तक नहीं पहुँचता, तब तक ये रिपोर्ट सिर्फ रद्दी का टुकड़ा है।



