विशेष रिपोर्ट : घरघोड़ा में ‘स्वच्छ भारत’ का दम घोटती प्रशासनिक लापरवाही; कागजों पर चमक, सड़कों पर कीचड़ का साम्राज्य…

घरघोड़ा (रायगढ़): छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का नगर पंचायत घरघोड़ा इन दिनों अपनी ‘अनोखी’ सफाई व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें स्वच्छता अभियान पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं घरघोड़ा नगर पंचायत में यह अभियान केवल फाइलों और विज्ञापनों तक सिमट कर रह गया है। यहाँ की सड़कों पर पसरा कचरा और जलभराव अब केवल समस्या नहीं, बल्कि नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर एक बदनुमा दाग बन चुका है।
तस्वीरों की जुबानी : बदहाली की कहानी – नगर पंचायत कार्यालय से कुछ ही दूरी पर मुख्य मार्ग का नज़ारा किसी ‘नर्क’ से कम नहीं है। सड़क किनारे जमा गंदा पानी और उसमें सड़ता कचरा न केवल राहगीरों के लिए मुसीबत बना हुआ है, बल्कि जानलेवा बीमारियों को भी खुला निमंत्रण दे रहा है।
- गंदगी का ‘स्थायी पता’ : स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहाँ कचरे का उठान हफ़्तों नहीं होता। कूड़े के ढेर अब लैंडमार्क बन चुके हैं।
- सड़क या तालाब? : ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली का आलम यह है कि हल्की बारिश या घरों से निकलने वाला पानी सड़कों पर ही जमा हो रहा है, जिससे कीचड़ और फिसलन की स्थिति बनी रहती है।
प्रशासन की ‘कुंभकर्णी’ नींद और जनता का आक्रोश – हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि लग्जरी गाड़ियों में बैठकर गुजरते हैं, लेकिन शायद उनकी बंद कांच की खिड़कियों तक न तो बाहर की बदबू पहुँचती है और न ही जनता की बेबसी दिखाई देती है।
“सफाई कर्मचारी यहाँ केवल फोटो खिंचवाने के लिए आते हैं। सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। अगर हम शिकायत लेकर जाते हैं, तो सिर्फ आश्वासन मिलता है, समाधान नहीं।” एक त्रस्त स्थानीय निवासी
अधिकारियों की ‘नजरअंदाज करने की कला’ – नगर पंचायत घरघोड़ा की कार्यशैली को देखकर ऐसा लगता है जैसे अधिकारियों ने ‘नजरअंदाज करने की कला’ में पीएचडी कर ली है। मुख्य कार्यालय के करीब ऐसी स्थिति होना यह दर्शाता है कि स्वच्छता केवल एक वार्षिक इवेंट बनकर रह गई है। क्या प्रशासन किसी बड़ी महामारी का इंतजार कर रहा है? या फिर बजट को ‘ठिकाने’ लगाने के चक्कर में सफाई के जमीनी काम को भुला दिया गया है?
तीखे सवाल: जवाब कौन देगा?
- नगर पंचायत के बजट का क्या हो रहा है? यदि सफाई के लिए फंड आता है, तो वह जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?
- निरीक्षण का दिखावा क्यों? क्या मुख्य मार्ग पर जमी गंदगी अधिकारियों को दिखाई नहीं देती या वे इसे अपनी ‘शान’ समझते हैं?
- जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ क्यों? मच्छरों के प्रकोप और जलजनित बीमारियों के लिए क्या प्रशासन अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेगा?
‘कचरा नगर’ बनने की ओर अग्रसर घरघोड़ा – अगर समय रहते नगर पंचायत घरघोड़ा ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो स्वच्छता रैंकिंग में नीचे गिरना तो तय है ही, साथ ही जनता का बचा-कुचा भरोसा भी उठ जाएगा। “स्वच्छता की नई परिभाषा” गढ़ने वाले इन हुक्मरानों को अब कागजों से बाहर निकलकर कीचड़ में उतरना होगा, वरना घरघोड़ा की पहचान एक सुंदर नगर के बजाय ‘कचरा हब’ के रूप में होने लगेगी।
अब देखना यह है कि इस खबर के बाद प्रशासन की नींद टूटती है या फिर हमेशा की तरह ‘फाइल’ पर ही सफाई कर दी जाएगी।




