कलेक्टर के कड़े तेवर : ’31 मार्च तक हर हाल में पूरा हो जल जीवन मिशन, वरना नपेंगे अधिकारी और ठेकेदार’…

रायगढ़। जिले में जल जीवन मिशन की सुस्त चाल और गुणवत्ता की अनदेखी पर कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्टोरेट सभा कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि 31 मार्च 2026 के बाद कोई बहाना स्वीकार नहीं होगा। मिशन मोड में काम पूरा करें, अन्यथा गाज गिरना तय है।
गुणवत्ता से समझौता यानी सीधी कार्रवाई – बैठक में कलेक्टर ने दो-टूक कहा कि सरकारी फाइलों में आंकड़े भरने के बजाय जमीन पर काम दिखना चाहिए। उन्होंने कहा:
- जीरो टॉलरेंस : पाइपलाइन बिछाने से लेकर नल कनेक्शन तक, मानकों में रत्ती भर की कमी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और निगरानी करने वाले इंजीनियरों पर सख्त कार्रवाई होगी।
- ग्राउंड जीरो पर निगरानी : सहायक और उप अभियंताओं को ऑफिस छोड़ मैदान में उतरने और सतत निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
पंचायतों को अल्टीमेटम : ‘काम पूरा तो हैंडओवर लें’ – योजना के पूर्ण होने के बाद भी हैंडओवर में हो रही देरी पर कलेक्टर ने तीखे निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में काम पूरा हो चुका है, उन्हें तत्काल योजना सौंपी जाए।
”अगर कोई पंचायत जानबूझकर योजना लेने में आनाकानी करती है या उदासीनता दिखाती है, तो उनकी सूची जिला पंचायत सीईओ को सौंपें। ऐसी पंचायतों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
ठेकेदारों और विभाग को अंतिम चेतावनी : बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री अभिजीत बबन पठारे और पीएचई की कार्यपालन अभियंता श्रीमती प्रतिभा नवरत्न की मौजूदगी में कलेक्टर ने ठेकेदारों से एक-एक प्रोजेक्ट की रिपोर्ट ली।
- समन्वय की कमी दूर करें: विभागीय खींचतान के कारण रुके कार्यों को तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए।
- अंतिम लक्ष्य: जिले के हर पात्र ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल पहुँचाना शासन की प्राथमिकता है, इसमें शिथिलता बरतने वालों के लिए प्रशासन में कोई जगह नहीं है।
मुख्य बिंदु जो खबर को बनाते हैं खास :
- डेडलाइन: 31 मार्च 2026 तक सभी कार्य अनिवार्य रूप से पूर्ण।
- सख्ती: लापरवाह पंचायतों और ठेकेदारों पर सीधी कार्रवाई की तलवार।
- प्राथमिकता: गुणवत्ता और जनहित सर्वोपरि।




