रायगढ़ : निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन का ‘हंटर’, नियमों को ताक पर रखा तो छिन जाएगी मान्यता…

रायगढ़। जिले के निजी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर चल रही ‘दुकानदारी’ पर अब कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कड़ा प्रहार किया है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्कूल अब पालकों की जेब पर डकैती नहीं डाल सकेंगे। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. राव ने स्पष्ट चेतावनी दी है: “नियमों का पालन करें, वरना तालाबंदी के लिए तैयार रहें।”
प्रशासन के कड़े फरमान : अब नहीं चलेगी मनमानी – बैठक में जारी निर्देश केवल सुझाव नहीं, बल्कि सख्त आदेश हैं जिनका उल्लंघन सीधे मान्यता समाप्ति की ओर ले जाएगा। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- बाजार से खरीदी की आजादी : स्कूल परिसर में गणवेश (यूनिफॉर्म) का नमूना रखना होगा। पालकों को किसी ‘खास दुकान’ से सामान लेने के लिए मजबूर करना अब अपराध माना जाएगा।
- फीस में पारदर्शिता : स्कूल को सूचना पटल पर एक-एक पैसे का हिसाब (मदवार विवरण) सार्वजनिक करना होगा। पालकों को पता होना चाहिए कि वे किस बात का पैसा दे रहे हैं।
- अपना ‘ब्रांड’ बंद करें स्कूल : कोई भी विद्यालय अपने नाम से कॉपियां या किताबें नहीं छपवा सकेगा। शिक्षा संहिता की कंडिका 95, 96 और 97 का पालन अनिवार्य है।
- मान्यता का प्रदर्शन : स्कूल को अपनी मान्यता और बोर्ड संबद्धता के दस्तावेज सार्वजनिक रूप से चस्पा करने होंगे।
“शिक्षा व्यापार नहीं है। यदि कोई भी स्कूल बच्चों या पालकों को विशिष्ट दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो बिना किसी रियायत के उस स्कूल की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।”
प्रशासन का सख्त संदेश
पालकों के लिए बड़ी राहत : अक्सर देखा गया है कि निजी स्कूल कमीशन के चक्कर में पालकों को चिह्नित दुकानों पर भेजते हैं। रायगढ़ प्रशासन के इस कदम से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक शोषण से भी मुक्ति मिलेगी।




