चांपा : सरकारी राशन दुकान में ‘अंधेरगर्दी’, नियमों की उड़ी धज्जियां; ₹17 की शक्कर ₹20 में, गोदाम बना गंदगी का ढेर…

जांजगीर-चांपा। जिले के चांपा शहर से राशन वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मांझाली तालाब के पास स्थित सेवा सहकारी समिति मर्यादित चांपा (पंजीयन क्रमांक 815) में संचालक और कर्मचारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि वे न तो शासन के नियमों को मान रहे हैं और न ही मानवीय संवेदनाओं को।
प्रमुख अनियमितताएं जिन पर उठ रहे हैं सवाल :
- शक्कर पर अवैध वसूली : शासन ने अंत्योदय और प्राथमिकता कार्डधारियों के लिए शक्कर की दर ₹17 प्रति किलो निर्धारित की है, लेकिन यहाँ खुलेआम ₹20 प्रति किलो वसूला जा रहा है। प्रति किलो ₹3 की यह अवैध वसूली हजारों उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रही है।
- खाद्यान्न का अपमान और गंदगी : जिस गोदाम में गरीबों का निवाला रखा है, वहाँ की स्थिति नारकीय है। चावल की बोरियों के पास कचरा फेंका गया है, कर्मचारी वहां पान-गुटखा खाकर थूक रहे हैं और चावल को पैरों तले रौंदा जा रहा है। स्वच्छता के दावों के बीच यह दृश्य विचलित करने वाला है।
- चावल की कालाबाजारी का ‘सौदा’ : दुकान अब भ्रष्टाचार का अड्डा बनती दिख रही है। आरोप है कि यहाँ से सरकारी चावल खुले बाजार में बेचा जा रहा है। एक महिला हितग्राही द्वारा एक क्विंटल चावल मांगे जाने पर उसे ₹2600 की कीमत बताकर दोपहर 3 बजे (चोरी-छिपे) आने को कहा गया, जो सीधे तौर पर कालाबाजारी की पुष्टि करता है।
- ‘डमी’ कर्मचारी के भरोसे दुकान : आधिकारिक तौर पर नियुक्त कर्मचारी राजेश रजक की अनुपस्थिति एक बड़ा सवाल है। उनके स्थान पर उनके भाई नरेश रजक द्वारा राशन का वितरण किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से नियम विरुद्ध है।
हितग्राहियों का आक्रोश : “हमें न केवल कम राशन और अधिक कीमत का डर सता रहा है, बल्कि गंदगी के बीच रखे अनाज से बीमारियों का खतरा भी है। प्रशासन को गहरी नींद से जागना होगा।”
प्रशासनिक मौन पर सवाल : इतनी बड़ी गड़बड़ियों के बावजूद अब तक खाद्य विभाग की टीम ने यहाँ दबिश क्यों नहीं दी? क्या स्थानीय रसूख के कारण इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है? स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जांच कर दुकान का लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया और दोषियों पर FIR दर्ज नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और उच्चाधिकारियों से शिकायत करेंगे।




