इंसानियत की मिसाल: मौत की पटरी से ‘जिंदगी’ खींच लाई जांबाज पूजा, ट्रेन से कटे युवक के दोनों पैर…

सूरजपुर। शनिवार की काली रात सूरजपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास एक युवक के लिए काल बनकर आई, लेकिन मौत और जिंदगी के बीच चल रही इस जंग में ‘मानवता’ जीत गई। जबलपुर-अंबिकापुर ट्रेन की चपेट में आने से 25 वर्षीय मयंक तिवारी ने अपने दोनों पैर गंवा दिए, पर एक युवती की अदम्य साहस ने उसकी जान बचा ली।
लोहे के पहियों के नीचे दबी चीखें : रात करीब 10:30 बजे, जब जबलपुर-अंबिकापुर एक्सप्रेस सूरजपुर क्रॉसिंग के पास पहुंची, तभी मयंक तिवारी ट्रेन की जद में आ गया। हादसा इतना वीभत्स था कि युवक के दोनों पैर घुटने के ऊपर से कट गए। पटरियों पर बिखरा खून और युवक की दिल दहला देने वाली चीखें सुनकर ट्रेन को इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोका गया।
जहां सब ठिठके, वहां पूजा ने दिखाया साहस : ट्रेन रुकने के बाद यात्री नीचे तो उतरे, लेकिन नीचे का मंजर देखकर सबकी रूह कांप गई। युवक खून से लथपथ तड़प रहा था। जब कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, तब कटनी से अंबिकापुर जा रही पूजा नाम की युवती मसीहा बनकर सामने आई।
- जांबाजी : पूजा बिना डरे ट्रेन के नीचे घुसी और मयंक को बाहर खींचा।
- तत्परता : अन्य यात्रियों की मदद से उसे सुरक्षित बाहर निकालकर परिजनों को सूचना दी गई।
- संवेदनशीलता : कटे हुए पैरों को भी साथ समेटा गया ताकि इलाज की गुंजाइश बनी रहे।
”खून से सने उस मंजर को देखकर जहां भीड़ मूकदर्शक बनी थी, वहां एक बेटी के साहस ने साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।”
अस्पताल में संघर्ष : पैर जोड़ना नामुमकिन – अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती मयंक की हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक घाव इतने गहरे और जटिल हैं कि स्थानीय स्तर पर पैर जोड़ना संभव नहीं हो सका। अब परिजनों ने बेहतर इलाज के लिए उसे निजी अस्पताल (संजीवनी) शिफ्ट करने का निर्णय लिया है।
हादसा या साजिश? गहरे सवाल – यह घटना जितनी दर्दनाक है, उतनी ही संदिग्ध भी। परिजनों का आरोप है कि:
- मयंक शाम को दोस्तों के साथ निकला था।
- उसे नशे की हालत में ट्रैक पर लेटाया गया था।
- अभी तक इस मामले में सूरजपुर पुलिस को आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।




