ATR में ‘रसूख’ के आगे नतमस्तक वन विभाग : टाइगर रिजर्व बना शिकारगाह, राइफल लेकर दिनभर गूंजती रही गोलियां…

मुंगेली। अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) की सुरक्षा व्यवस्था और दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कुछ रसूखदार युवकों ने जंगल को अपनी निजी जागीर बना लिया है। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बनाए गए कड़े नियमों को ठेंगा दिखाते हुए लोरमी के कुछ युवक न केवल प्रतिबंधित कोर जोन में हथियारों के साथ दाखिल हुए, बल्कि घंटों तक वहां फायरिंग और पिकनिक का आनंद भी लिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी ‘दबंगई’ में वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी मूकदर्शक ही नहीं, बल्कि मददगार की भूमिका में नजर आए।
‘लाल कालीन’ जैसा स्वागत, रक्षक ही बने भक्षक : सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने विभाग की पोल खोल कर रख दी है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि:
- जमुनाही बैरियर : जब अजीत वैष्णव, अनिकेत और विक्रांत वैष्णव की निजी गाड़ी यहाँ पहुंची, तो ड्यूटी पर तैनात गार्ड ने बिना किसी पूछताछ या चेकिंग के बैरियर खोल दिया।
- सुरही प्रवेश द्वार : यहाँ गाड़ी के पहुंचते ही कर्मचारी ने इस फुर्ती से दरवाजा खोला, मानो कोई बड़ा मंत्री या आला अधिकारी आया हो।
- स्वच्छंद विचरण : युवक कोर एरिया के जकड़बांधा, सुरही और भुरकुंड होते हुए कंचनपुर तक लगभग 14 से 16 किमी तक राइफल लहराते हुए घूमते रहे।
1 घंटे का रास्ता, 4 घंटे का ‘आतंक’ : नियमों के मुताबिक इस दूरी को तय करने में अधिकतम एक घंटा लगता है, लेकिन ये युवक जंगल के भीतर 4 घंटे से ज्यादा समय तक मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान उन्होंने जगह-जगह रुककर फायरिंग की और आग जलाकर जश्न मनाया। यह वही इलाका है जहाँ बाघों की आवाजाही सबसे ज्यादा होती है। युवकों के हाव-भाव और बेखौफ अंदाज गवाही दे रहे हैं कि यह कोई पहली बार की गई गलती नहीं, बल्कि उनका पुराना शौक है।
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की तैयारी? – वीडियो वायरल होने के बाद जब चौतरफा किरकिरी हुई, तब कहीं जाकर विभाग ने कार्रवाई की बात कही है। हालांकि, स्थानीय चर्चाओं की मानें तो रसूखदारों को बचाने का खेल पर्दे के पीछे शुरू हो चुका है। सवाल यह उठता है कि:
- प्रतिबंधित क्षेत्र में निजी राइफल कैसे पहुंची?
- बैरीकेट पर चेकिंग क्यों नहीं की गई?
- क्या बाघों की सुरक्षा भगवान भरोसे है?
संपादकीय टिप्पणी : अचानकमार में बढ़ता दखल और रसूखदारों की ये ‘जंगल सफारी’ बाघों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है। अगर गेट पर तैनात कर्मचारियों से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वह दिन दूर नहीं जब ATR केवल कागजों पर ही टाइगर रिजर्व रह जाएगा।

