नेशनल हाइवे-49 पर मौत से आमने-सामने टक्कर…

रायगढ़। नेशनल हाइवे-49 पर स्थित कोल्ड स्टोरेज के पास आज दोपहर बाल-बाल बचा बड़ा हादसा इस इलाके की घोर लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती को उजागर कर गया। चावल लोड एक भारी वाहन और गठान लोड दूसरी गाड़ी की आमने-सामने हुई भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि सड़क जाम हो गई और कोल्ड स्टोरेज की दीवार पलभर में ढह गई। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, वरना यह टक्कर मौत का तांडव मचा सकती थी।
टक्कर का खौफनाक मंजर : स्थानीय लोगों के अनुसार, ओडिशा रोड पर बने सरकारी गोदाम से चावल लोड गाड़ी धर्मकांटा कराने कोल्ड स्टोरेज के अंदर दाखिल हुई थी। तभी सामने से आ रही गठान लोड तेज रफ्तार भारी वाहन ने गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयंकर थी कि चावल लोड वाहन पीछे धकेलते हुए सीधा कोल्ड स्टोर की दीवार से जा भिड़ा और दीवार भरभराकर जमींदोज हो गई।
मौके पर मची अफरातफरी, लोग दौड़ पड़े, हाईवे पर लंबा जाम लग गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह इलाका हर रोज मौत को दावत देता है, लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।
हादसा और सुलह की ‘जुगाड़बाज़ी’ : दोनों गाड़ियां स्थानीय यूनियन से जुड़ी बताई जा रही हैं। हादसे की सूचना पाकर पेट्रोलियम पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन इससे पहले ही यूनियन पदाधिकारी सक्रिय हो गए और आपसी सुलह कर मामला वहीं रफा-दफा कर दिया। न कोई एफआईआर, न कोई कार्रवाई — सिर्फ जाम हटाकर ट्रैफिक बहाल कर दिया गया। सवाल यह है कि आखिर यूनियनों और प्रशासन की इस ‘सुलह संस्कृति’ की कीमत कब तक आम जनता अपनी जान दांव पर लगाकर चुकाती रहेगी?
स्थायी खतरे की जड़ : स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कोल्ड स्टोर के पास बने धर्मकांटे से गाड़ियों का लगातार आना-जाना सबसे बड़ा खतरा है। हाईवे पर अचानक भारी वाहनों का मोड़ना और खड़ा होना रोजाना दुर्घटना को न्यौता देता है। बावजूद इसके, न तो ट्रैफिक पुलिस की तैनाती होती है और न ही कोई स्थायी सुरक्षा व्यवस्था।
प्रशासन से सवाल :
- नेशनल हाइवे पर लगातार बनते ऐसे खतरनाक हालात को कब गंभीरता से लिया जाएगा?
- कोल्ड स्टोर धर्मकांटा पर वाहनों की अव्यवस्थित आवाजाही पर कब नियंत्रण होगा?
- यूनियनों के दबाव में हादसों को रफा-दफा करने की ‘प्रथा’ पर कब रोक लगेगी?
👉 सच यह है कि नेशनल हाइवे-49 का यह ब्लैक स्पॉट किसी दिन बड़े जनसंहार का कारण बन सकता है। सवाल उठता है — प्रशासन कब जागेगा? या फिर किसी बड़ी जानलेवा दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?