पत्थलगांव में शिक्षा और खेल विभाग का दोहरा खेल उजागर…

जशपुर। हैप्पी भाटिया। जिले के पत्थलगांव में शिक्षा विभाग और खेल प्रभारी से जुड़े दो दस्तावेज़ों ने पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला शासकीय आवास और खेल मैदान के बोरिंग के पानी की सप्लाई से जुड़ा है। दोनों पत्रों में विभागीय दावों और जमीनी हकीकत में गहरा विरोधाभास साफ दिखाई देता है।
24 जून 2025 को जारी पत्र (क्रमांक/1157/शिक्षा रथा./2025-26) में विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी, पत्थलगांव ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि क्रीड़ा प्रभारी को इस कार्यालय से किसी भी प्रकार का शासकीय आवास आवंटित नहीं किया गया है और इस संबंध में कोई आदेश अथवा दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। विभाग का यह आधिकारिक बयान सीधे तौर पर इस चर्चा पर विराम लगाने जैसा है कि प्रभारी को सरकारी आवास उपलब्ध कराया गया है। लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि यदि आवास का कोई आदेश नहीं है, तो फिर प्रभारी किन परिस्थितियों में शासकीय आवास का उपयोग कर रहे हैं? क्या यह विभागीय मिलीभगत और नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं है?
दूसरी ओर, 20 मार्च 2025 को जारी पत्र में स्वयं विकास खण्ड क्रीड़ा प्रभारी ने स्वीकार किया है कि खेल मैदान में खुदवाए गए बोर से न केवल मैदान की पिच और छिड़काव हेतु पानी सप्लाई किया जा रहा है, बल्कि उसी बोर से उनके कार्यालय और स्वामी आत्मानंद विद्यालय के छात्र-छात्राओं को भी पेयजल आपूर्ति की जा रही है। प्रभारी ने यह जरूर स्पष्ट किया है कि बोर से किसी भी प्रकार की “निजी सप्लाई” नहीं की गई है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या खेल मैदान के लिए खुदवाए गए बोर का उपयोग कार्यालय और विद्यालय तक पानी पहुँचाने के लिए नियमों के अनुरूप है?
इन दोनों दस्तावेज़ों को एक साथ देखने पर तस्वीर और भी साफ हो जाती है। शिक्षा विभाग दावा कर रहा है कि शासकीय आवास का आवंटन ही नहीं हुआ, जबकि खेल प्रभारी खेल संसाधनों का इस्तेमाल कार्यालय तक के लिए स्वीकार कर रहे हैं। यानी कागजों पर कुछ और लिखा जा रहा है और व्यवहार में कुछ और हो रहा है। यह स्थिति विभागीय कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े करती है।
अब यह पूरा मामला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में पहुँच चुका है। लेकिन स्थानीय जनता का सवाल बहुत सीधा है-
- अगर शासकीय आवास का कोई आदेश नहीं है, तो प्रभारी किनकी अनुमति से रह रहे हैं?
- खेल मैदान के लिए खुदवाए गए बोर का पानी कार्यालय और विद्यालय तक क्यों पहुँचाया जा रहा है?
- और सबसे अहम- क्या शिक्षा और खेल विभाग के अधिकारी नियम-कायदों से ऊपर हैं?
पत्थलगांव में उठे ये सवाल केवल एक आवास या बोरिंग के पानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सीधा सवाल खड़ा करते हैं। अगर अब भी जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश साफ होगा कि नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत में मनमानी और गोलमाल ही व्यवस्था का सच है।