बालोद

खटाल संचालक की लापरवाही से वार्डवासियों में नाराज़गी व्याप्त, बदबू से लोग परेशान

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले के दल्ली राजहरा स्थित वार्ड 02 पंडर दल्ली में एक व्यवसायिक खटाल संचालक द्वारा चलाए जा रहे दूध व्यवसाय को लेकर वार्डवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। वार्डवासी शिकायत करते हैं कि खटाल में करीब 10 दुधारू पशु हैं, जिससे खटाल संचालक सालाना लाखों की कमाई होती है, लेकिन इसके बावजूद आसपास के रहने वाले लोगों को इससे होने वाली गंदगी और बदबू से राहत नहीं मिल रही। क्षेत्र के सोमा नियोगी, गंगा तांडी और भानुमति के घर के बाजू यह खटाल संचालित है, जिससे आवासीय इलाके में समस्या और बढ़ गई है।

वार्डवासियों के अनुसार, इस गंभीर समस्या को लेकर वार्ड पार्षद से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन पार्षद श्रीमती पूनम सोरी भी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है। विवाद के बीच पार्षद पति ने भी कहा कि “जो करना है कर लो,” जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष और बढ़ गया है। वार्डवासियों ने नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू को भी शिकायत की, लेकिन वहां से कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं हुई।

इस पूरे मामले ने नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास कम कर दिया है। लोगों का कहना है कि भले ही खटाल संचालक को आर्थिक लाभ हो रहा हो, मगर आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को प्रभावित करना उचित नहीं है। साथ ही, खटाल से निकलने वाले गोबर, मल-मूत्र आदि का सही निस्तारण न होने से गंदगी और बदबू फैल रही है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है।

अब वार्डवासियों श्रीमती लक्ष्मी निर्मलकर, श्रीमती सीमा नियोगी, सूरज रावटे, श्रीमती मीना चौधरी, श्रीमती दुर्गा देवांगन, लक्ष्मण, विजय टांडिया, श्रीमती मीरा फारसी, मक्खन जायसवाल आदि की मांग है कि स्थानीय प्रशासन तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे और खटाल संचालक अश्विनी यादव को नियमों का पालन करने के लिए कहें। साथ ही, पार्षद और नगरपालिका अध्यक्ष को भी जवाबदेही तय करनी होगी ताकि आवासीय क्षेत्रों में इस प्रकार की समस्याओं को जल्द सुलझाया जा सके।

शहरी क्षेत्र में दुधारू पशुओं के दूध व्यवसाय (खटाल) संचालन और अपशिष्ट प्रबंधन के नियम बिंदुवार है :

  • लाइसेंस और पंजीकरण : नगर पालिका परिषद से पशुपालन के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है। पशुओं की संख्या अधिक होने पर पंजीकरण कराना जरूरी है।
  • स्थान एवं स्वच्छता : खटाल आवासीय एवं शहरी क्षेत्रों में निर्धारित दूरी पर होना चाहिए। पशुपालन स्थल साफ-सफाई, हवादार और बीमारियों से मुक्त होना चाहिए।
  • अपशिष्ट प्रबंधन : गौ-मूत्र, गोबर और अन्य अपशिष्ट का संग्रहण उचित तरीके से करना और नियमित निस्तारण जरूरी है। महीनों तक अपशिष्ट खुला पड़ा रहना पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, यह नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
  • पर्यावरण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा : अपशिष्ट निस्तारण के बिना लगातार जमा रहने से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई हो सकती है। स्थानीय स्वच्छता अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत जुर्माना एवं कार्रवाई संभव है।
  • दंड और नियम उल्लंघन : अपशिष्ट निस्तारण न करने पर नगरपालिका द्वारा जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में खटाल को बंद करने की भी कार्रवाई होती है।

नियमों के अनुसार व्यवसायिक खटाल (दूध व्यवसाय) के लिए रहवासी/आवासीय इलाके से न्यूनतम दूरी 200 मीटर होनी चाहिए और साथ ही :

  • खटाल आवासीय इलाकों और सार्वजनिक जगहों से कम से कम 200 मीटर दूर होना चाहिए।
  • खटाल नदी, तालाब, तालाब, अस्पताल और स्कूल से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर हो।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग या नहर से कम से कम 200 मीटर की दूरी होनी अनिवार्य।
  • खटाल के मल-मूत्र जैसे अपशिष्ट का उचित संग्रहण और निस्तारण अनिवार्य है ; खुले में महीनों तक जमा रखना प्रदूषण कानूनों का उल्लंघन है।
  • ग्रीन बेल्ट का निर्माण करना और पेड़ लगाना भी जरूरी है।

यह नियम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशा-निर्देशों और स्थानीय नगरपालिका अधिनियमों पर आधारित हैं। खुले अपशिष्ट के कारण जुर्माना और खटाल बंद करने तक की कार्यवाही हो सकती है। 

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