रायपुर कांग्रेस का ‘यू-टर्न’: 19 चेहरों की बलि के बाद सुलझा ‘लिस्ट कांड’, महामंत्री ने दिखाई हरी झंडी!।।।

रायपुर। राजधानी में कांग्रेस के भीतर हफ्ते भर से चल रहा ‘सियासी हाई-वोल्टेज ड्रामा’ आखिरकार पटाक्षेप की ओर है। 66 वार्ड अध्यक्षों की जिस सूची को लेकर प्रदेश और जिला संगठन के बीच तलवारें खिंची थीं, उसमें 19 नामों की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद अब नया फरमान जारी कर दिया गया है।

अकड़ ढीली या आपसी समझौता? – पिछली बार जिस सूची को प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गेंडू ने ‘अवैधानिक’ बताकर आधी रात को कूड़ेदान में डाल दिया था, उसी संगठन ने अब संशोधित सूची को हरी झंडी दे दी है। चर्चा है कि शहर अध्यक्ष कुमार मेनन की ‘जल्दबाजी’ और पीसीसी की ‘नाराजगी’ के बीच बीच का रास्ता निकाला गया है। इस नई लिस्ट में 19 पुराने नामों को बदलकर संतुलन साधने की कोशिश की गई है।
विवाद की जड़ : क्यों मचा था कोहराम? – पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पीसीसी चीफ दीपक बैज ने 15 अप्रैल तक कार्यकारिणी गठन का अल्टीमेटम दिया। शहर कांग्रेस ने जोश में आकर बिना मंजूरी के 66 नाम सार्वजनिक कर दिए।
- अनुशासन का डंडा : पीसीसी ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना और तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।
- अस्तित्व की जंग : विवाद सिर्फ नामों का नहीं था, बल्कि यह संदेश देने का था कि संगठन में ‘बॉस’ कौन है।
क्या अब खत्म होगी खींचतान? – नई सूची को आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद भले ही कागजों पर विवाद खत्म दिख रहा हो, लेकिन पार्टी के भीतर सुगबुगाहट अभी भी तेज है।
- 19 नाम क्यों बदले गए? क्या ये नाम किसी खास गुट के थे या योग्यता के पैमाने पर कमतर?
- कार्यकर्ताओं में अविश्वास: बार-बार सूची बदलने और रद्द करने से कार्यकर्ताओं में संगठन की छवि को धक्का लगा है।
चुभता सवाल : क्या 19 नामों की इस काट-छांट के बाद कांग्रेस की यह ‘वार्ड सेना’ एकजुट होकर मैदान में उतर पाएगी, या भीतरघात की आग अभी और सुलगती रहेगी?
निष्कर्ष : संगठन महामंत्री के हस्ताक्षर के साथ अब रायपुर शहर कांग्रेस की नई टीम आधिकारिक हो गई है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस में नियुक्तियां अब सिर्फ नाम तय करना नहीं, बल्कि ‘पावर बैलेंस’ का खेल बन चुकी हैं।




