राजधानी में कानून के पहरेदारों को चोरों की खुली चुनौती, थाने के सामने से ‘जब्त मेटाडोर’ चोरी!…

रायपुर। राजधानी में अपराधियों का दुस्साहस अब उस स्तर पर पहुँच गया है जहाँ उन्हें वर्दी का रत्ती भर भी खौफ नहीं रह गया है। फाफाडीह यातायात थाने के ठीक सामने से पुलिस कस्टडी में रखे एक भारी वाहन (मेटाडोर) की चोरी ने पूरे महकमे की नींद उड़ा दी है। यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ है।
जब्त वाहन का विवरण और कार्रवाई की पूरी कहानी – घटना का सिलसिला 7 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ। यातायात पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर एक मेटाडोर क्रमांक CG12BH3683 को पकड़ा था। वाहन पर निम्नलिखित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी :
- धारा 115 : मोटर व्हीकल एक्ट (प्रतिबंधित मार्ग में प्रवेश)।
- धारा 194 : अधिक भार या यातायात नियमों की अवहेलना।
कार्रवाई के बाद, यातायात विभाग ने वाहन को यातायात थाना फाफाडीह के ठीक सामने मुख्य मार्ग पर खड़ा करवा दिया था। एएसआई (ASI) केशरी कुमार साहू ने वाहन चालक को सख्त निर्देश दिए थे कि वह 8 अप्रैल की सुबह 11 बजे अपने मूल दस्तावेजों के साथ पेश हो, ताकि चालानी कार्रवाई पूरी की जा सके।
9 और 10 अप्रैल की वह ‘काली रात’ – हैरानी की बात यह है कि यह भारी-भरकम वाहन दो दिनों तक थाने की ‘सुरक्षा’ में खड़ा रहा। लेकिन 9 और 10 अप्रैल की दरमियानी रात अज्ञात चोरों ने पुलिस की गश्त और निगरानी को धता बताते हुए इस विशाल मेटाडोर पर हाथ साफ कर दिया। 10 अप्रैल की सुबह जब पुलिसकर्मियों की नजर उस खाली जगह पर पड़ी जहाँ मेटाडोर खड़ा था, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
दो दिनों तक ‘गुपचुप’ तलाश, फिर दर्ज हुई FIR – थाने के सामने से गाड़ी चोरी होने की खबर फैलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अपनी साख बचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने पहले दो दिनों तक अपने स्तर पर गुपचुप तरीके से गाड़ी की तलाश की। जब सफलता नहीं मिली और मामला उच्च अधिकारियों तक पहुँचने लगा, तब जाकर गंज थाने में औपचारिक शिकायत दी गई।
एएसआई केशरी कुमार साहू की शिकायत पर गंज पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
जांच के घेरे में पुलिसिया चौकसी : उठते गंभीर सवाल – इस घटना ने शहर की कानून व्यवस्था पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं :
- सीसीटीवी कैमरों की भूमिका : क्या थाने के बाहर लगे कैमरे बंद थे? यदि चालू थे, तो एक भारी वाहन को ले जाते हुए किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी?
- गश्त पर सवाल : रात के समय जब पुलिस गश्त का दावा करती है, तो चोरों ने इंजन स्टार्ट करके गाड़ी ले जाने का साहस कैसे किया?
- सुरक्षा में चूक या मिलीभगत : क्या यह महज एक चोरी है या इसके पीछे किसी विभागीय लापरवाही या मिलीभगत की संभावना है?
अधिकारियों का दावा : “घेराबंदी जारी है” – मामला दर्ज होने के बाद अब अफसर डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं और फाफाडीह से लेकर शहर के निकास द्वारों तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही मेटाडोर समेत चोरों को दबोच लिया जाएगा।
यदि राजधानी में पुलिस कस्टडी में रखा माल ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए किसके पास जाए? यह चोरी पुलिस की प्रतिष्ठा पर एक ऐसा दाग है जिसे धोने के लिए उन्हें जल्द से जल्द बरामदगी करनी होगी।



